नहीं रहें दुनिया को ब्लैक होल और बिग बैंग की थ्योरी समझाने वाले स्टीफन हॉकिंग

स्टीफन हॉकिंग
स्टीफन हॉकिंग। (फाइल फोटो)

आरयू इंटरनेशनल डेस्‍क। 

वर्ल्‍ड फेमस भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग का 76 साल की आयु में बुधवार को ब्रिटेन के कैम्ब्रिज स्थित उनके घर पर निधन हो गया। कॉस्मोलॉजिस्ट हॉकिंग ने दुनिया को ब्लैक होल और बिग बैंग की थ्योरी को समझाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

यूके की मीडिया ने परिवार के प्रवक्‍ता के हवाले से बताया कि उनकी मृत्‍यु कैंब्रिज स्थित उनके घर पर हुई। स्टीफन हॉकिंग का जन्म आठ जनवरी 1942 को फ्रेंक और इसाबेल हॉकिंग के घर में हुआ। हॉकिंग ने यूनिवर्सिटी कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में अपनी विश्वविद्यालय की शिक्षा 1959 में 17 वर्ष की आयु में शुरू की।

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बता दें कि 1963 में स्टीफन हॉकिंग जब मात्र 21 साल के थे, तब उन्हें मोटर न्यूरोन नामक लाइलाज बीमारी हो गयी थी। इसके चलते उनके ज्यादातर अंगों ने धीरे-धीरे काम करना बंद कर दिया था। इस बीमारी से पीड़ित लोग अमूमन दो से पांच साल तक ही जिंदा रह पाते हैं, लेकिन अपनी मजबूत इच्‍छा शक्ति के दम पर वह लंबे समय तक जिंदा रहे।

इस बीमारी के बाद डॉक्टरों ने भी उनसे कहा था कि उनके जीवन के सिर्फ दो साल बचे हैं, लेकिन वह पढ़ने के लिए कैम्ब्रिज चले गए और एल्बर्ट आइंस्टिन के बाद दुनिया के सबसे महान सैद्धांतिक भौतिकीविद बने। उन्‍हें नोबेल पुरस्‍कार से भी सम्‍मानित किया गया था।

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रिपोर्ट के अनुसार हांकिंग का कहना था कि लगभग सभी मांसपेशियों से मेरा नियंत्रण खो चुका है और अब मैं अपने गाल की मांसपेशी के जरिए, अपने चश्मे पर लगे सेंसर को कम्प्यूटर से जोड़कर ही बातचीत करता हूं। साथ ही वह ये भी कहते थे कि उनकी बिमारी ने ही उन्‍हें वैज्ञानिक बनने के लिए प्रेरणा दी। बिमारी की चपेट में आने से पहले

हॉकिंग का मानना था मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मैंने ब्रह्माण्ड को समझने में अपनी भूमिका निभाई। इसके रहस्य लोगों के खोले और इस पर किये गये शोध में अपना योगदान दे पाया। मुझे गर्व होता है जब लोगों की भीड़ मेरे काम को जानना चाहती है।

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