जनता के भारी विरोध के बाद अब UP में प्राइवेट कंपनियां नहीं लगा पाएंगी जबरन स्मार्ट मीटर

स्मार्ट मीटर
प्रतीकात्मक फोटो।

आरयू ब्यूरो, लखनऊ। जनता के भारी विरोध के बाद विद्युत नियामक आयोग ने प्रीपेड व पोस्ट पेड स्मार्ट मीटर के चयन को लेकर चल रहे विवाद पर विराम लगाने के लिए कदम बढ़ाया है। दरअसल यूपी में अब प्राइवेट कंपनियां जबरन आपके घरों में  स्मार्ट मीटर नहीं लगा पाएंगी। शुक्रवार को जारी किए गए आदेश में आयोग ने स्पष्ट किया है कि विद्युत अधिनियम -2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं के पास अपने विद्युत कनेक्शन पर पोस्टपेड अथवा प्रीपेड मीटर में से किसी एक को चुनने करने का अधिकार रहेगा।

इस आदेश के बाद अब बिजली कंपनियां किसी भी उपभोक्ता पर प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने का दबाव नहीं बना सकेंगी। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में 16 अप्रैल को स्मार्ट प्रीपेड मीटर से ही नए कनेक्शन दिए जाने तथा उपभोक्ताओं के पुराने मीटर हटाकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाने के बिजली कंपनियों के निर्णय के विरुद्ध लोक महत्व का प्रस्ताव दाखिल किया था। साथ ही आयोग ने इस प्रस्ताव पर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन व के अध्यक्ष के साथ ही सभी विद्युत वितरण कंपनियों के प्रबंध निदेशकों से जवाब मांगा था।

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बिजली कंपनियों की तरफ से विधि सम्मत जवाब नहीं मिलने पर आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह उपभोक्ताओं के हित में यह फैसला सुनाया कि पोस्ट पेड अथवा प्रीपेड मीटर का विकल्प चुनने का अधिकार उपभोक्ताओं के पास रहेगा। इस आदेश के बाद बिजली कंपनियों को अब विद्युत अधिनियम-2003 के प्रविधानों के तहत ही मीटर लगाना होगा। ये आदेश मौजूदा कनेक्शन के साथ ही लगने वाले नए कनेक्शन पर समान रूप से लागू होगा। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि यूपी देश का पहला राज्य बन गया है जहां विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 47(5) पर आयोग ने अलग से आदेश जारी किया है।

वहीं यूपी की बिजली कंपनियां इसमें कोई बदलाव नहीं कर सकेंगी। कास्ट डाटा बुक की व्यवस्थाएं विद्युत अधिनियम और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा समय समय पर जारी किए गए दिशा निर्देशों के मुताबिक ही लागू की जा सकती हैं। बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं के पोस्टपेड कनेक्शन को मनमाने तरीके से प्रीपेड में परिवर्तित नहीं कर सकेंगी।

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