आरयू ब्यूरो, लखनऊ। यूपी में बढ़ते गुमशुदगी के मामलों को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार के संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे प्रदेश में गुमशुदा व्यक्तियों से जुड़े सभी आंकड़े और उपलब्ध रिकॉर्ड अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें। साथ ही अदालत ने अपर मुख्य सचिव (गृह) और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को अगली सुनवाई के दौरान तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को निर्धारित की गई है।
ये आदेश न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने पारित किया। जबकि सुनवाई को दौर पेश किए गए इस आंकड़े को अदालत ने बेहद चिंताजनक और गंभीर स्थिति बताते हुए स्वतः संज्ञान लिया और इसे ‘प्रदेश में गुमशुदा व्यक्तियों के संबंध में’ शीर्षक से जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया।
बढ़ती संख्या है गंभीर चुनौती
न्यायालय ने माना कि गुमशुदा व्यक्तियों की बढ़ती संख्या कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र के लिए गंभीर चुनौती है। इसलिए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट और ठोस कार्ययोजना मांगी गई है। अदालत ने संकेत दिया कि प्रस्तुत किए जाने वाले आंकड़ों और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, ताकि गुमशुदा मामलों की जांच और ट्रैकिंग प्रणाली को और प्रभावी बनाया जा सके।
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1,08,300 लोग लापता
दरअसल, एक गुमशुदा व्यक्ति से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय के संज्ञान में यह तथ्य आया कि उत्तर प्रदेश में पिछले लगभग दो साल के दौरान 1,08,300 लोग लापता हो चुके हैं, जिनके संबंध में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। हालांकि इनमें से केवल 9,700 लोगों का ही अब तक पुलिस द्वारा पता लगाया जा सका है।




















