आरयू ब्यूरो, लखनऊ। यूपी अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक शेषनाथ पांडेय को गंभीर वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप में बर्खास्त किया गया। शासन ने जांच पूरी होने के बाद लोक सेवा आयोग की सहमति और राज्यपाल की मंजूरी के बाद बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया है। विभागीय जांच में कुल 15 आरोपों में से 14 आरोप सिद्ध पाए गए।
विभागीय जांच पूरी होने के बाद मामला यूपी लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) को भेजा गया। आयोग ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए बर्खास्तगी की अनुशंसा की। इसके बाद शासन ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मंजूरी मांगी। राज्यपाल ने पूरी फाइल का अध्ययन करने के बाद बर्खास्तगी को मंजूरी दे दी। शासन ने आज विशेष आदेश जारी कर शेषनाथ पांडेय को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया।
दरअसल अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न योजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगते रहे थे। संयुक्त निदेशक शेषनाथ पांडेय के खिलाफ मुख्य रूप से छात्रवृत्ति वितरण, अल्पसंख्यक छात्रावासों के रखरखाव, निर्माण कार्यों और अन्य कल्याणकारी योजनाओं में गड़बड़ी के आरोप थे। शासन ने 2024 में इन आरोपों पर गहन विभागीय जांच शुरू की थी, जिसमें विशेष टीम ने दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और लाभार्थियों के बयानों की जांच की। जांच में कुल 15 गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिनमें से 14 आरोप पूरी तरह सिद्ध पाए गए।
जांच रिपोर्ट में शामिल प्रमुख आरोप
छात्रवृत्ति राशि में हेराफेरी और फर्जी लाभार्थियों के नाम पर पैसे निकासी
अल्पसंख्यक छात्रावासों के निर्माण और रखरखाव में अनियमितता
विभागीय फंड का दुरुपयोग और व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल
दस्तावेजों में हेराफेरी और फर्जी बिल-पेपर तैयार करना
वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह करने के प्रयास
इनमें से 14 आरोप पूरी तरह सिद्ध होने के बाद शासन ने बर्खास्तगी का अंतिम निर्णय लिया।
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वहीं शेषनाथ पांडेय की बर्खास्तगी के बाद अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में संयुक्त निदेशक पद पर नई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है। विभाग ने सभी योजनाओं के फंड ट्रांसफर और लाभार्थी सत्यापन को और सख्त करने के निर्देश दिए हैं।
