योगी सरकार से नाराज शंकराचार्य अविमुक्तेश्‍वरानंद बिना स्‍नान ही प्रयागराज संगम से लौटे, कहा संतों का किया गया अपमान

शंकराचार्य
प्रेसवार्ता में बोलते शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद।

आरयू ब्यूरो, लखनऊ/प्रयागराज। उत्‍तर प्रदेश की योगी सरकार से नाराज शंकराचार्य स्‍वामी अविमुक्तेश्वरानंद बिना संगम स्नान किए ही प्रयागराज से लौट गए हैं। इससे पहले उन्‍होंने इसका ऐलान करते हुए कहा कि दुखी मन से लौट रहा हूं, यहां साधु-संतों का अपमान किया गया है। उन्‍होंने कहा कि प्रयागराज हमेशा से परंपरा और विश्वास की जमीन रही है, लेकिन यहां जो कुछ भी घटित हुआ उसने उनकी आत्मा को झकझोर कर रख दिया है।

आज एक प्रेसवार्ता में शंकराचार्य स्‍वामी अविमुक्तेश्‍वरानंद ने माघ मेला छोड़ जाने का ऐलान कर कहा कि माघ मेले के दौरान हुई घटना से आहत होकर वह स्नान किए बिना वापस लौटने का फैसला लिया है। शंकराचार्य ने कहा कि माघ मेले में स्नान करना उनके लिए केवल एक परंपरा नहीं बल्कि गहरी आस्था का विषय था, लेकिन मौजूदा हालात में उनका मन इतना व्यथित है कि उन्होंने यह कठिन निर्णय लिया है। उनके अनुसार, संगम तट पर संतों का जिस तरह से अपमान किया गया, उसने न्याय और मानवता के सामूहिक विश्वास पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रशासन ने भेजा था ससम्मान स्नान कराने का प्रस्‍ताव, लेकिन…

इस दौरान शंकराचार्य ने खुलासा किया कि प्रशासन ने उन्हें ससम्मान स्नान कराने और उन पर पुष्पवर्षा करने का प्रस्ताव भेजा था। उन्होंने इसे यह कहकर ठुकरा दिया कि प्रशासन ने उस दिन की घटना के लिए माफी नहीं मांगी। उन्होंने कहा, ‘अगर मैं केवल स्नान करके और पुष्पवर्षा करवाकर लौट जाता, तो यह मेरे उन भक्तों और संतों के साथ अन्याय होता जिनका अपमान हुआ है।’ साथ ही बताया कि पिछले दस-ग्यारह दिनों से वह और उनके अनुयायी न्याय के लिए फुटपाथ पर बैठने को मजबूर थे।

एक तरफ सरकार संतों के सम्मान की बात करती है,…

वहीं गृहमंत्री के बयानों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार संतों के सम्मान की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ माघ मेले में संतों को उनकी चोटी और शिखा पकड़कर घसीटा और पीटा गया। उन्होंने इसकी तुलना मुगल काल के व्यवहार से करते हुए सरकार के दोहरे चरित्र पर निशाना साधा। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संगम तट पर न केवल उनकी भौतिक हत्या का प्रयास हुआ, बल्कि उनकी ‘पीठ’ की गरिमा को खत्म करने की कोशिश की गई।

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शंकराचार्य ने सीधे तौर पर कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे योगी सरकार का हाथ है और सनातन विरोधियों को सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म करते समय उन्होंने दो मिनट का मौन रखा और कहा कि संतों का अपमान करने वालों को दंड देने के लिए वह भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं। साथ ही कहा कि वे भले ही आज संगम से नहाए बिना जा रहे हैं लेकिन अपने पीछे कुछ सवालों को छोड़कर जा रहे हैं जो प्रयागराज में हमेशा गूंजते रहेंगे।

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