आरयू वेब टीम। शनिवार को दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्लूसी) की बैठक हुई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हाल में संसद के शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार ने नरेगा को समाप्त कर करोड़ों गरीबों और कमजोर तबके के लोगों को बेसहारा कर दिया है। गरीबों के पेट पर लात मारने के साथ उनकी पीठ में मोदी सरकार ने छूरा घोंपा है। मोदी सरकार को गरीबों की चिंता नहीं, बल्कि चंद बड़े पूंजीपतियों के मुनाफे की ही चिंता है।
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कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आज ऐसे मौके पर विचार और भविष्य की रणनीति बनाने के लिए एकत्र हुए हैं, जब देश में लोकतंत्र, संविधान और नागरिकों के अधिकारों पर चारों तरफ गंभीर संकट छाया है। मनरेगा को समाप्त करना, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान है। मुझे दुख है कि मोदी सरकार ने राइट टू वर्क पर सुनियोजित और क्रूर हमला किया है। साथ ही कहा कि मनरेगा यूपीए सरकार का ऐसा दूरदर्शी कदम है जिसे पूरे विश्व ने सराहा। जब मैं लेबर मिनिस्टर था तो मैं जी-20 देशों के आइएलओ सम्मेलनों में जाता था, तो दूसरे देशों के पीएम और मंत्रियों ने इस योजना की बहुत तारीफ की थी। इस बात का गवाह हूं।
…योजना ने ग्रामीण भारत का चेहरा बदला
साथ ही बताया कि दो फरवरी, 2006 को बंडलापल्ली, आंध्र प्रदेश में सोनिया गांधी जी और डॉ मनमोहन सिंह जी ने मनरेगा की शुरुआत की थी। इस योजना ने ग्रामीण भारत का चेहरा बदला। यह विश्व का सबसे बड़ा ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम बना। इससे पलायन रुका, गावों को अकाल, भूख और शोषण से मुक्ति मिली। इस योजना ने दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और भूमिहीन मजदूरों को भरोसा दिया कि गरीबी से जंग में सरकार उनके साथ खड़ी है। आज भारत में गरीबी से मुक्ति पाई एक पूरी पीढ़ी मौजूद है जो मनरेगा की बदौलत स्कूल पहुंची, पढ़ी-लिखी और सम्मान से जी रही है। इस योजना के असर को देख कर ही इसे राष्ट्रपिता के नाम पर समर्पित किया गया था। पर मोदी सरकार ने बिना किसी अध्ययन या मूल्यांकन के, राज्यों से या राजनीतिक दलों से सलाह मशविरा के बिना इसे खत्म करके नया कानून थोप दिया। सारा काम तीन काले कृषि कानूनों जैसा किया।
तीन काले कृषि कानून थोप दिए
इस दौरान खड़गे ने कहा कि इस समय देशव्यापी आंदोलन की जरूरत है। इसका पुरजोर विरोध देश के हर कोने में होना चाहिए। क्योंकि इसके पहले जनवरी 2015 में जब मोदी सरकार ने कॉरपोरेट हितों में भूमि अधिग्रहण कानून बदला तो कांग्रेस के लोग सड़कों पर उतरे और सरकार को पीछे हटना पड़ा। फिर जून 2020 में लॉकडाउन के बीच मोदी जी ने अध्यादेश लाकर तीन काले कृषि कानून थोप दिए। उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष के विरोध के बाद भी कानून पास हो गया। इसके विरोध में आंदोलन कर रहे 700 से अधिक किसानों ने शहादत दी। सरकार ने कीलें बिछाईं, पानी की बौछारें चलाईं, उनका दमन किया। हम किसानों के हक में डटे रहे और नवंबर 2021 में प्रधानमंत्री को किसानों से माफ़ी मांगते हुए कानून वापस लेने पड़े। इसी तरह मनरेगा कानून भी सरकार को वापस लेना होगा।
SIR सोची समझी साजिश
बैठक में खड़गे ने कहा कि आज एसआइआर एक गंभीर चिंता का विषय है। ये लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने की एक सोची समझी साजिश है। राहुल जी ने बार-बार तथ्यों और उदाहरणों के साथ ‘वोट चोरी’ का प्रमाण देश के सामने रखा है। भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत जगजाहिर है। इसलिए हमें सुनिश्चित करना होगा कि हमारे वोटरों के नाम न काटे जाएं। हमें देखना होगा कि मतदाता सूची से गरीब और कमजोर तबकों के लोगों खास तौर पर दलित, आदिवासी, अति पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों के नाम न कटने पायें। न ही उन्हें दूसरे बूथों में ट्रांसफर किया जाए। इसके लिए हमारे बीएलएएस को वोटर लिस्ट लेकर घर-घर जाना होगा।
CBI जैसी संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा
मोदी सरकार को निशाने पर लेते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि बीते 11 वर्षों में देश ने देखा है कि किस तरह ईडी, आइटी और सीबीआइ जैसी संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। बीजेपी और संघ परिवार नेशनल हेराल्ड के मुद्दे पर हमारे नेताओं की छवि को खराब करने में लगे है। हम न्यायिक लड़ाई लड़ रहे हैं। ‘सत्यमेव जयते’ ये बात राहुल जी हमेशा कहते हैं, हमारी जीत होगी।
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले की निंदा
इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने संबोधन के माध्यम से बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने पूरे देश को चिंतित किया है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।



















