‘घूसखोर पंडित’ के टाइटल पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, समाज के किसी वर्ग का अपमान बर्दाश्त नहीं

आरयू वेब टीम। फिल्म जगत में अक्सर फिल्मों के नाम और कहानी को लेकर विवाद कोर्ट तक पहुंच जाते हैं। इस बार भी एक फिल्म पर मचा विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बॉलीवुड एक्टर मनोज बाजपेयी की फिल्म घूसखोर पंडित अपने टाइटल की वजह से कानूनी पचड़े में फंसी है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए फिल्म के निर्माताओं को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने स्पष्ट रूप से कहा कि कला के नाम पर समाज के किसी एक वर्ग को निशाना बनाना या उन्हें बदनाम करना कतई स्वीकार्य नहीं है।

अदालत ने इसे नैतिकता और सार्वजनिक व्यवस्था के सिद्धांतों के खिलाफ मानते हुए अगली सुनवाई अब 19 फरवरी को तय की है। तब तक के लिए मेकर्स को अपने टाइटल पर पुनर्विचार करने और कोर्ट की आपत्तियों का समाधान खोजने का समय दिया गया है। वहीं सुनवाई के दौरान अदालत से फिल्म के निर्माता नीरज पांडे को सीधे तौर पर फटकार का सामना करना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि आखिर फिल्म के लिए ऐसे विवादित शीर्षक का चुनाव ही क्यों किया गया जो समाज के एक हिस्से की छवि को धूमिल करता हो।

पीठ ने कड़े शब्दों में निर्देश दिया कि जब तक फिल्म का शीर्षक बदला नहीं जाता और कोर्ट को इस बदलाव के बारे में सूचित नहीं किया जाता, तब तक फिल्म की रिलीज को हरी झंडी नहीं दी जाएगी। साथ ही नीरज पांडे को एक हलफनामा भी जमा करने को कहा गया है, जिसमें उन्हें ये साबित करना होगा कि उनकी फिल्म किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाती है।

दरअसल ये पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब ‘ब्राह्मण समाज ऑफ इंडिया’ के राष्ट्रीय संगठन सचिव अतुल मिश्रा ने नेटफ्लिक्स पर आने वाली इस फिल्म के खिलाफ जनहित याचिका दायर की। याचिका में आरोप लगाया गया कि फिल्म का नाम और इसका विषय जातिगत भेदभाव और नकारात्मक रूढिय़ों को बढ़ावा देता है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि पंडित जैसे शब्द को घूसखोर जैसे अपमानजनक विशेषण के साथ जोडऩा न केवल अनैतिक है, बल्कि यह सांप्रदायिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों के लिए भी एक बड़ा खतरा है। उनका कहना है कि इस तरह का चित्रण समाज में नफरत फैला सकता है और एक विशेष जाति की छवि को गलत ढंग से पेश कर सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए न केवल फिल्म निर्माता बल्कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को भी नोटिस जारी किया है। अदालत ये जानना चाहती है कि ऐसे शीर्षकों को अनुमति देने की प्रक्रिया क्या है और क्या इससे सामाजिक व्यवस्था बिगडने का खतरा नहीं है। फिलहाल कोर्ट ने फिल्म रिलीज पर एक तरह से तलवार लटका दी है। फिल्म की स्टार कास्ट की बात करें तो इसमें मनोज बाजपेयी के साथ नुसरत भरूचा, साकिब सलीम और अक्षय ओबेरॉय जैसे बड़े नाम शामिल हैं, लेकिन अब इन सभी की मेहनत की किस्मत कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी है।

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