आरयू एक्सक्लूसिव, लखनऊ। अनंत नगर योजना के टेंडरों में गड़बड़ी का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ था कि टेंडर पूलिंग व हरियाली के नाम पर मनमाने खर्च के लिए चर्चा में रहने वाले लखनऊ विकास प्राधिकरण का एक और बड़ा कारनामा सामने आ गया है। अफसर-इंजीनियरों ने पिछले रिकॉर्ड तोड़ते हुए इस बार अपनी बदहाल सड़कें छोड़ते हुए एनएचएआइ के हरे-भरे शहीद पथ पर अपनी सोच वाली हरियाली लाने के नाम पर जनता के 43 करोड़ खर्च करने की मंशा बनाई है, इसके लिए एक ही काम के छह टुकड़े कर टेंडर भी कराया गया है।
उद्यान अनुभाग से जुड़े अधिकारियों की ये कारस्तानी सामने आने पर जहां कई गंभीर सवाल उठने लगे हैं। वहीं प्राधिकरण की कुछ बड़ी कुर्सियों पर बैठे जिम्मेदार अफसरों को भी जवाब नहीं सूझ रहा। वह यह भी नहीं बता पा रहें कि एक ही काम के टेंडर को पार्ट में करने की क्या जरूरत पड़ गयी थीं।
G-20 के समय लगे थे एक लाख पेड़-पौधे
बताते चलें कि एनएचएआइ की सड़क होने के बाद भी शहीद पथ की हरियाली के नाम पर एलडीए कुछ महीनों के अंतराल पर भारी-भरकम रकम खर्च करता रहता है। इसके अलावा फरवरी 2023 में लखनऊ में आयोजित हुए जी-20 समिट के समय भी शहीद पथ के मीडियन डिवाइडर व सड़क के दोनों तरफ 20 प्रकार के एक लाख पौधे लगाने, 50 हजार वर्गमीटर कारपेट घास बिछाने के साथ ही पेड़-पौधों की सिंचाई के लिए जगह-जगह बोरिंग कराने व पाइप लाइन बिछाने का दावा प्रेस नोट जारी कर एलडीए के तत्कालीन वीसी व उद्यान से जुड़े अफसरों ने भी खुद ही किया था।
कमता से कानपुर रोड तक हरा-भरा शहीद पथ
चिनहट के कमता से शुरू हो कानपुर रोड तक के 23 किलोमीटर लंबे शहीद पथ को वर्तमान में न सिर्फ बीच, बल्कि सड़क को दोनों तरफ रंग-बिरंगे फूलों व हरियाली ने लगभग कवर कर रखा है। यही वजह है कि कुछ समय से शहीद पथ की गिनती राजधानी की सबसे ज्यादा ग्रीनरी वाली सड़कों में भी होने लगी है।

अपने ही लगाए पेड़-पौधे उखाड़ेगा LDA!
वहीं शहीद पथ पर घनी हरियाली के बाद भी 43 करोड़ खर्च करने के लिए लाखों पौधे लगाने के लिए बेचैन प्राधिकरण के अफसर-इंजीनियर ये पौधे लगाएंगे कहां, इसे लेकर प्राधिकरण कार्यालय में भी इस समय काफी चर्चा है। जानकारों का मानना है कि 43 करोड़ के हॉर्टीकल्चर वर्क के लिए काफी जगह की जरूरत होगी, जबकि शहीद पथ के बीच व आसपास खाली जमीन अब न के बराबर है, ऐसे ही रहा तो प्राधिकरण के अधिकारी अपनी मंशा पूरी करने के लिए जी-20 समिट के समय जिन कीमती पेड़-पौधों को लगवाकर वाहवाही लूटते थे अब वह खुद ही उन्हें उखड़वा डालेंगे।

43 करोड़ में एक साल देखभाल
टेंडर की रकम के साथ ही इसके कराने के समय को लेकर भी सवाल उठ रहें हैं। उद्यान से जुड़े जानकारों का मानना है कि 43 करोड़ के टेंडर में मात्र सालभर का ही अनुरक्षण जोड़ा गया है, जबकि अक्टूबर से लेकर फरवरी तक पेड़-पौधों को देखभाल खासकर सिंचाई की जरूरत न के बराबर होती है। ऐसे में अनुरक्षण के नाम पर भी खर्च होने वाले जनता के करोड़ों रुपये को बचाया जा सकता है।
अवास विकास ने तो पैसा देने से किया मना!
एलडीए के अधिकारी शहीद पथ पर हरियाली की नई क्रांति लाने के नाम पर भले ही 43 करोड़ खर्च करने के लिए बेचैन हो, लेकिन आवास विकास परिषद के अफसर इसके पक्ष में नहीं है। सूत्रों की मानें तो एलडीए ने इसके लिए अवस्थापना निधि की एक बैठक का हवाला देते हुए शहीद पथ के लिए करीब नौ करोड़ रुपये की मांग की थीं। जिसपर आवास विकास ने उसे और भी जरूरी काम होने की बात बताते हुए पैसा देने से इंकार कर दिया है, ऐसे में आधा दर्जन टेंडर वाला यह एकलौता काम अटक भी सकता है।
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पांच से नौ करोड़ में बंटी हरियाली
सूत्र बताते हैं कि एक बड़े अफसर के इशारे पर उद्यान के अधिकारियों ने शहीद पथ के काम को संदिग्ध तरीके से करीब पांच करोड़ से लेकर नौ करोड़ रुपये तक में बांटकर टेंडर कराया है। हालांकि अभी टेंडर प्रक्रिया पूरी होने व वर्क ऑर्डर जारी होने के लिए एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार की मंजूरी मिलना बाकी है।
वहीं टेंडर के टुकड़ों की बात की जाए तो कुल 42 करोड़ 85 लाख से ज्यादा के हरियाली के काम का पहला पार्ट सात करोड़ 88 लाख में (कमता से शहीद पथ की 4.100 किलोमीटर तक), दूसरे भाग लगभग सात करोड़ (4.100 से 7.30 किमी तक), तीसरे पार्ट सात करोड़ 43 लाख (7.30 से 10.60 किमी तक), चौथे पार्ट का करीब चार करोड़ 82 लाख (10.60 से 13.20 किमी तक), पांचवां भाग छह करोड़ 68 लाख (13.20 से 17.60 किमी तक), जबकि छठे भाग का नौ करोड़ छह लाख (17.60 से 23.00 किमी तक) का टेंडर कराया गया है।
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इस बारे में जहां चीफ इंजीनियर नवनीत शर्मा ने एलडीए के पूर्व में लगाए गए किसी भी पेड़ को हटाने की बात से इंकार किया है। वहीं एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार का कहना है शहीद पर हॉर्टीकल्चर वर्क डेवलप करने के लिए प्राधिकरण ने टेंडर कराएं हैं। शहीद पथ को संवारने के लिए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से निर्देश दिए गए थे। टेंडर व कार्य में किसी तरह की अगर गड़बड़ी सामने आती हो तो उसे ठीक कराया जाएगा।





















