लखनऊ में युवक की जान जाने के बाद चाइनीज मांझा पर हाईकोर्ट सख्त, योगी सरकार से पूछा मौत के बाद क्यों हरकत में आता है अमला

इलाहाबाद हाई कोर्ट

आरयू ब्यूरो, लखनऊ। राजधानी लखनऊ समेत यूपी में खतरनाक चाइनीज मांझे से होने वाली मौतों और लगातार रहागीरों के घायल होने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने योगी सरकार से पूछा है कि मौत के बाद ही अमला क्यों हरकत में आता है। साथ ही इसकी रोकथाम के लिए राज्य सरकार को ठोस कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए हैं।

हाई कोर्ट ने आज योगी सरकार से पूछा कि प्रदेश में चाइनीज मांझे पर रोक के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे? इसके लिए सरकारी वकील को 11 मार्च तक जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही कहा कि अभिभावकों समेत बच्चों में खतरनाक मांझे के प्रति जागरुकता फैलाई जाए।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने बुधवार को ये आदेश स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की साल 2018 में दाखिल जनहित याचिका पर दिया। इसमें प्रदेश में चाइनीज मांझे पर सख्त प्रतिबंध लगाने की गुजारिश की गई है। दरअसल याची ने मीडिया रिपोर्ट को पेश कर कहा कि हाल ही में करीब दस लोग लगातार चाइनीज मांझे से घायल हुए हैं। इनमें से कुछ की मौत भी हो गई है।

यह भी पढ़ें- एक लाख लोग यूपी से गुमशुदा, हाईकोर्ट ने खुद संज्ञान ले ACS-DGP को किया तलब

इस पर कोर्ट ने सरकारी वकील से पूछा कि आखिर लोगों की जान जाने या घायल होने पर ही सरकारी अमला क्यों कार्यशील होता है। इसके मद्देनजर, कोर्ट ने सरकार को इसकी रोकथाम के लिए स्थाई ठोस कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया। ताकि, ऐसी घटनाएं न हों।

वहीं योगी सरकार की ओर से हाई कोर्ट पहुंचे मुख्य स्थाई अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने खुद चाइनीज मांझे पर सख्ती से प्रतिबंध लगाने को कारवाई की है। आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने सरकारी वकील को मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देकर अगली सुनवाई 11 मार्च को नियत की है।

यह भी पढ़ें- हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने अधिवक्ताओं को लगाई फटकार, बेतुकी याचिकाएं दायर करने से बचने की दी नसीहत