आरयू वेब टीम। कैश कांड में नाम आने के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की तैयारी चल रही थी। इसी बीच जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है। यशंवत वर्मा ने शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा भेजा है। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश रहे यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास से कथित तौर पर नकदी मिली थी। इसे लेकर विवाद गहरा गया और उनके खिलाफ महाभियोग की तैयारी चल रही थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज यशंवत वर्मा ने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में कहा है कि मैं उन कारणों की तह नहीं जाना चाहता जिन्होंने मुझे यह पत्र लिखने के लिए मजबूर किया है। जस्टिस वर्मा ने पत्र में लिखा, ”अत्यंत दुख के साथ मैं इलाहाबाद हाई कोर्ट में जज के पद से अपना इस्तीफा तत्काल प्रभाव से दे रहा हूं। इस पद पर सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है।’
गौरतलब है कि जस्टिस यशवंत वर्मा ने पांच अप्रैल 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में शपथ ली थी, लेकिन उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। मामले की जांच पूरी होने तक उन्हें न्यायिक कामों से दूर रखा गया था। दरअसल जस्टिस वर्मा के घर से कैश बरामदगी के बाद उनके खिलाफ लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था। उन्होंने इसे चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसमें कहा था कि दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन राज्यसभा ने उसे मंजूर नहीं किया। इसके बावजूद लोकसभा ने जांच समिति बना दी, जो गलत है।
यह भी पढ़ें- जस्टिस यशवंत वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से झटका, महाभियोग प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
बताया जा रहा है कि 14 मार्च 2025 को अधजली नकदी मिलने के बाद मामला और गंभीर हो गया। जांच के दौरान जस्टिस वर्मा ने समिति के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यदि अधिकारियों ने घटनास्थल को सुरक्षित नहीं रखा, तो इसके लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। फिलहाल, उनके इस्तीफे के बाद महाभियोग प्रक्रिया पर क्या असर पड़ेगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। वहीं, जांच समिति अपनी कार्रवाई जारी रखी है।
कौन हैं यशवंत वर्मा?
यशवंत वर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (प्रयागराज) में हुआ था। उन्होंने दिल्ली के हंसराज कॉलेज से बी.कॉम (ऑनर्स) किया और फिर रीवा विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। आठ अगस्त 1992 को उन्होंने वकालत के पेशे में कदम रखा। साल 2006 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में विशेष अधिवक्ता नियुक्त हुए। इसके बाद 2012-13 में वे उत्तर प्रदेश के मुख्य स्थायी अधिवक्ता बने। अगस्त 2013 में सीनियर एडवोकेट का दर्जा हासिल किया। 13 अक्टूबर 2014 को वे इलाहाबाद हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बने और एक फरवरी 2016 को उन्हें स्थायी जज नियुक्त किया गया। 11 अक्टूबर 2021 को उनका तबादला दिल्ली हाईकोर्ट में कर दिया गया था।


















