आरयू ब्यूरो, लखनऊ। योगी सरकार में लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के लिए राहत की खबर है। विधान परिषद में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का सोमवार को जवाब देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट घोषणा की कि शिक्षामित्र, अनुदेशक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आशा कार्यकत्रियों के मानदेय में बढ़ोतरी की जाएगी। साथ ही निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजनों की पेंशन भी बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। हालांकि मात्र दस हजार मानदेय में साल 2017 स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षामित्रों को अभी और कितना इंताजार करना होगा इस बारे में आज सीएम योगी ने साफ नहीं किया है।
योगी ने ऐलान किया कि हम आंगनवाड़ी और आशा वर्कर का मानदेय बढ़ाएंगे। सरकार शिक्षामित्र व अनुदेशक के लिए काम कर रही है। इन सब को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिया है। विधानसभा परिषद में विपक्ष के सवालों का जवाब दे रहे सीएम योगी ने कहा कि हमने गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का मार्ग अपनाया है।
साथ ही सीएम पीएम मोदी ने आजादी के अमृत महोत्सव के तहत विकसित भारत का आह्वान किया। हमने सभी तीर्थों के विकास का कार्य किया। आज उत्सव प्रदेश की पहचान दीपोत्सव, देव दीपावली और रंगोत्सव से है। 2017 तक यूपी की जीडीपी 13 लाख करोड़ थी। 2017 के बाद जब भाजपा की सरकार बनी तो महज आठ साल में यूपी की जीडीपी 23 लाख करोड़ हो गई। सीडी रेश्यो 45 प्रतिशत से बढ़ाकर 62 प्रतिशत हुआ। उत्तर प्रदेश आज रेवन्यू सरप्लस स्टेट है।
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इह दौरान योगी ने विपक्षी दलों खासतौर से समाजवादी पार्टी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सपा का विकास जेपीएनआईसी, गोमती रिवर फ्रंट और पूर्वांचल एक्सप्रेस वे में देखा जा सकता। सपा ने जेपी और लोहिया के सपनों पर कुठाराघात किया है। सीएम ने एसआइआर के मुद्दे पर कहा, सपा संवैधानिक संस्थाओं का अपमान कर रही है और समाज में विद्वेष फैलाने का प्रयास कर रही है।
आगे कहा कि सपा को कांग्रेस से सबक लेना चाहिए। जिस तरीके से विधान परिषद कांग्रेस विहीन हो गई है, यदि सपा ने रवैया न बदला तो विधान परिषद और विधानसभा में उसकी भी वही स्थिति हो जाएगी।




















