आरयू ब्यूरो, लखनऊ। रामभद्राचार्य के मेरठ के रामकथा में ‘मिनी पाकिस्तान’ वाले विवादित बयान पर राजनीति लगातार गहराई हुई है। अब इस बयान पर आजाद समाज पार्टी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद ने हमला बोला है। चंद्रशेखर ने कहा कि ऐसे जनपद को ‘मिनी पाकिस्तान’ कहना निंदनीय है। साथ ही उस कथन पर कटाक्ष किया जिसमें कथावाचक ने कहा था कि मुझे बचपन से आंखें नहीं हैं। चंद्रशेखर ने कहा कि सनातन के हिसाब से कोई व्यक्ति इतनी बड़ी सजा कैसे पाता होगा कि उसे आंखें ही न दीं जाएं?
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बरेली में बुधवार को संजय कम्युनिटी हॉल में आयोजित ‘अस्तित्व बचाओ-भाईचारा बनाओ’ प्रबुद्धजन सम्मेलन में नगीना से सांसद चंद्रशेखर ने तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य पर निशाना साधते हुए कहा कि संत की न कोई जाति होती है, न कोई धर्म होता है। ऐसे में एक संत ऐसे हैं जिनकी आंखें नहीं हैं। सोच लीजिए उनके कितने पाप होंगे। उन्होंने कहा कि लोग ऐसे अपराधी से ज्ञान ले रहे हैं।
विनाश के रास्ते पर बढ़ रहा यूपी
वहीं अपने संबोधन में आजाद समाज पार्टी प्रमुख ने धार्मिक असहिष्णुता, संवेदनहीन प्रशासन और समाज में फैली जातिगत असमानता के मुद्दे उठाए। नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने यूपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश विकास नहीं, बल्कि विनाश के रास्ते पर बढ़ रहा है। वाराणसी में एक घटना का जिक्र करते हुए बोले- जन्म के दो घंटे बाद ही मां और नवजात को अस्पताल से निकाल दिया गया। यही इस सरकार की संवेदनहीनता है।
मुसलमानों और कमजोर पर हो रहा अत्याचार
इस दौरान चंद्रशेखर ने कहा कि मुसलमानों और कमजोर वर्गों पर अत्याचार हो रहे हैं। गरीबों के अधिकार छीने जा रहे हैं। हालात नेपाल जैसे हो गए हैं और लोगों का सरकार से भरोसा उठ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार चांद पर जाने की बातें करती है, लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और है। जातिगत जनगणना 1931 के बाद पूरी तरह नहीं हुई है। अब समय आ गया है कि जातिगत के साथ आर्थिक जनगणना भी हो और मंडल कमीशन की सभी सिफारिशें लागू हों। धन और धरती का बंटवारा होना चाहिए, तभी असली बराबरी आएगी।
बैलेट पेपर से होना चाहिए चुनाव
वहीं ईवीएम का विरोध करते हुए नगीना सांसद ने कहा कि लंबे समय से ईवीएम से चुनाव हो रहे हैं, लेकिन जनता का भरोसा उस पर से खत्म हो रहा। उन्होंने कहा चुनाव बैलेट पेपर से होना चाहिए, किसानों की दुर्दशा पर बात करते हुए बोले- न जमीन बची, न फसल। छुट्टा पशुओं ने जो बचा था वो भी चौपट कर दिया। ऊपर से गुलदार का खौफ किसानों को खेत में जाने नहीं दे रहा। बिजनौर में गुलदार ने बच्चों और महिला की जान ले ली, लेकिन सरकार खामोश है। क्या गरीब-मजदूर की जान की कोई अहमियत नहीं? उन्होंने कहा कि गांवों में रहने वाले लोगों की तकलीफें सरकार को नहीं दिखतीं। यूरिया तक की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
जातीय जनगणना की मांग
सांसद चंद्रशेखर ने जातिगत जनगणना की मांग की है। चंद्रशेखर ने बताया कि 1931 के बाद से संपूर्ण जातिगत जनगणना नहीं हुई। इसलिए, आज जातिगत और आर्थिक दोनों प्रकार की गणना जरूरी है ताकि असमानता और गरीबी का वास्तविक चेहरे सामने आएं। देश में आज भी 80 करोड़ लोगों के सरकारी राशन पर निर्भर होने की बात कही है। उन्होंने कहा कि धन और धरती में बंटवारा होना चाहिए। उन्होंने बाबा साहब को याद करते हुए कहा कि लोकतंत्र में वोट का अधिकार हमें संविधान से मिला है। बेटियों को भी बराबरी का मौका मिलना चाहिए क्योंकि बेटी पढ़ेगी तो तीन पीढ़ियां सुधरेंगी।




















