सुपरस्टार थलापती विजय की ‘जन नायकन’ को बड़ा झटका, हाई कोर्ट ने सर्टिफिकेट के आदेश पर लगाई रोक

जन नायकन
एक्टर थलापती विजय।

आरयू वेब टीम। फिल्म के निर्माताओं और सेंसर बोर्ड के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। जिससे तमिल सुपरस्टार थलापति विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जन नायकन’ की रिलीज एक बार फिर कानूनी अड़चनों में फंस गई है। मद्रास हाई कोर्ट ने मंगलवार को उस एकल- न्यायाधीश के आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया गया था।

चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी अरुल मुरुगन की बेंच ने प्रोड्यूसर्स से कहा कि पहले मामले की कार्यवाही के दौरान प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया था। कोर्ट ने सिंगल बेंच को यह भी निर्देश दिया कि सेंसर बोर्ड को मामले में जवाब देने का मौका दिया जाए। प्रोड्यूसर, केवीएन प्रोडक्शंस, से रिट याचिका में संशोधन करने के लिए कहा गया।

दरअसल कोर्ट ने सुनवाई के बाद 20 जनवरी को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। यह फिल्म, जिसे एक्टर विजय की राजनीति में पूरी तरह से आने से पहले आखिरी स्क्रीन प्रेजेंस के तौर पर प्रमोट किया जा रहा है, सीबीएफसी द्वारा सर्टिफिकेट जारी करने में देरी के बाद एक विवाद में बदल गई है। 51 वर्षीय एक्टर ने पहले एक राजनीतिक कार्यक्रम में भीड़ को संबोधित किया और कहा कि वह “दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।”

सीनियर एडवोकेट सतीश पारासरन, सीनियर एडवोकेट प्रदीप राय और एडवोकेट विजयन सुब्रमण्यम, जिन्होंने कोर्ट में केवीएन प्रोडक्शंस का प्रतिनिधित्व किया, ने तर्क दिया कि मेकर्स को पहले बोर्ड ने बताया था कि फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट दिया जाएगा, लेकिन सर्टिफिकेशन कभी नहीं दिया गया। मेकर्स ने कोर्ट को बार-बार यह भी बताया कि उन्होंने फिल्म में सुझाए गए बदलाव किए थे, फिर भी बोर्ड ने सर्टिफिकेट रोक लिया, और इसके बजाय इसे रिवाइजिंग कमेटी को भेज दिया। परासरन ने यह भी बताया कि सीबीएफसी जिस शिकायत पर भरोसा कर रहा था, उसमें ऐसे सीन हटाने की मांग की गई थी जिन्हें पहले ही एग्जामिनिंग कमेटी के सुझावों के आधार पर हटा दिया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि बोर्ड का उन सीन पर दोबारा विचार करने का प्रयास एक फालतू और बिना मकसद की कवायद थी।

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गौरतलब है कि नौ जनवरी को, मद्रास हाई कोर्ट के एक सिंगल जज ने प्रोडक्शन हाउस के पक्ष में फैसला सुनाया और सीबीएफसी को बिना किसी देरी के फिल्म को सर्टिफिकेट देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि सीबीएफसी चेयरपर्सन ने अपनी अथॉरिटी से बाहर जाकर काम किया, जब उन्होंने प्रोड्यूसर्स को पहले ही बता दिया था कि फिल्म को सर्टिफाइड किया जाएगा, उसके बाद भी रिव्यू का आदेश दिया। जज ने बोर्ड की भी आलोचना की कि उन्होंने एग्जामिनिंग कमेटी के सदस्यों की सिफारिशें जमा करने के बाद भी उनकी शिकायतों पर विचार किया। सिंगल जज के फैसले के बाद, चीफ जस्टिस की बेंच के सामने तुरंत मामला उठाया गया। उसी दिन, एक डिवीजन बेंच ने आदेश पर रोक लगा दी, साथ ही प्रोड्यूसर्स के खिलाफ “नकली जल्दबाजी करने और न्यायिक प्रक्रिया पर दबाव डालने” के लिए कड़ी टिप्पणी भी की।

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