आरयू ब्यूरो, लखनऊ। बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के यूआइईटी में तैनात रहे ऑफिस असिस्टेंट विजय कुमार द्विवेदी को लखनऊ की सीबीआइ की स्पेशल कोर्ट ने रिश्वत केस में चार साल की कैद और 30,000 जुर्माना की सजा सुनाई है। सीबीआइ की टीम ने आरोपी को 2017 में एक कांट्रेक्चुअल असिस्टेंट प्रोफेसर से 50,000 रुपए की घूस लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा था।
यूआइईटी के एक कांट्रेक्चुअल असिस्टेंट प्रोफेसर ने आरोप लगाया था कि ऑफिस असिस्टेंट विजय कुमार द्विवेदी ने उनकी सेवा अवधि बढ़ाने के लिए 50,000 रुपए घूस मांगे हैं। शिकायत के मुताबिक आरोपित ने दावा किया था कि वह यूआइईटी के निदेशक के माध्यम से काम करवाएगा।
असिस्टेंट प्रोफेसर ने सीबीआइ में इसकी शिकायत की थीं, जिसकी पुष्टि के बाद सीबीआइ ने जाल बिछाया। ट्रैप के दौरान विजय कुमार द्विवेदी शिकायतकर्ता से 50,000 रुपए रिश्वत लेते समय पकड़ लिया गया। दो जून 2017 को उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। मौके से मिले साक्ष्यों और बरामद रकम को कोर्ट में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया। यह साक्ष्य मजबूत माना गया।
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सीबीआइ ने जांच पूरी कर एक अगस्त 2017 को चार्जशीट दाखिल की। लगभग शून्य साल तक चले ट्रायल के बाद नौ दिसंबर 2025 को सीबीआइ की विशेष अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया। उसे चार साल जेल और 30,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। कोर्ट ने कहा कि सरकारी संस्थान में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले ऐसे मामले गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हैं।




















