आरयू ब्यूरो, लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को एक बार फिर दालमंडी गली में हो रही तोड़फोड़ पर योगी सरकार पर निशाना साधा है। साथ ही तंज कसते हुए कहा कि ‘‘सत्तारूढ़ पार्टी पैसों को छोड़कर किसी की सगी नहीं है।”
सपा मुखिया ने आज अपने आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट के माध्यम से एक वीडियो पोस्टकर कर कहा कि ‘‘भाजपा अपने संगी-साथियों को फायदा पहुंचाने के चक्कर में काशी की दालमंडी में हर घर-दुकानदार को दल रही है। ये जुल्म और अत्याचार जनता अब और नहीं सहेगी।”
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इस दौरान अखिलेश यादव ने आरोप लगाया, ‘‘भाजपा पैसों को छोड़कर किसी की सगी नहीं है। सत्ता भी भाजपाइयों को सिर्फ पैसे कमाने के लिए ही चाहिए।” यूपी के पूर्व सीएम ने आरोप लगाते हुए आगे कहा कि ‘‘भाजपा विश्वासघात का दूसरा नाम बन गयी है। भाजपा जाए तो हर इंसान चैन पाए!”
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सपा प्रमुख ने इस पोस्ट के साथ दो मिनट 19 सेकंड का एक वीडियो क्लिप भी साझा की, जिसमें लखीमपुर खीरी जिले के मूल निवासी और (राम मंदिर आंदोलन) कारसेवा के दौरान कथित तौर पर 22 दिनों तक जेल में बंद रहे संजीव जायसवाल योगी सरकार पर बहुत ही तीखे ढ़ग से योगी सरकार पर तंज कसते नजर आ रहें हैं। संजीव ने बताया कि उनकी भी दो दुकाने ध्वस्तीकरण की जद में आ रही है।
विश्वनाथ गली के दुकानदारों की तरह नहीं मिल रहा मुआवजा
बताते चलें कि छह से दस फिट चौड़ी दालमंडी गली में योगी सरकार ध्वस्तीकरण अभियान चलवा रही है। अधिकारियों की मानें तो इस अभियान के बाद गली लगभग दस गुना चौड़ी हो जायेगी। वहीं सरकार की इस कार्रवाई से वहां के सैकड़ों दुकानदारों में रोष है। उनका कहना है कि योगी सरकार यहां के दुकानदारों को कॉरिडोर बनाने के लिए विश्वनाथ गली के दुकानदारों की तरह मुआवजा नहीं दे रही है, जबकि उन लोगों ने दशकों पहले लाखों रुपये का नजराना देकर दुकानें खरीदी थीं।
अधिकारी कर रहें प्रताडि़त, अगामी चुनाव…
वहीं लोगों में इस बात की भी नाराजगी है कि विश्वानाथ कॉरिडोर को रास्ता देने के नाम पर आधा दर्जन मस्जिदें भी तोड़ने की बात कही जा रही है। दुकानदारों को कहना है कि पुलिस व विभागों के अधिकारी लगातार उन लोगों को तरह-तरह से प्रताडि़त कर रहें हैं, अधिकारी कई जगाहों पर तो नाप से ज्यादा भी दुकानें तोड़ने की बात कह रहें हैं। हालांकि कई दुकानदारों का यह भी मानना है कि ये पूरी परियोजना ही समाज का माहौल खराब करने के लिये लायी गयी है, जिससे कि यूपी के अगामी विधानसभा चुनाव में इसका लाभ उठाया जा सके।



















