आरयू ब्यूरो, लखनऊ। सड़क हादसों की बढ़ती संख्याओं पर यूपी के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि सड़क सुरक्षा में होने वाली मौतों को घटाने के लिए जन-जागरूकता सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। यदि लोग हेलमेट, सीट बेल्ट और यातायात नियमों को जीवन का हिस्सा बना लें तो दुर्घटनाओं में जान गंवाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। साथ ही कहा कि नियमों के पालन में मीडिया और समाज की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
लोक निर्माण विभाग स्थित विश्वेश्वरैया सभागार में सोमवार को आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। साथ ही कहा कि प्रशिक्षण के माध्यम से विभागीय अधिकारी अधिक सक्षम होंगे और फील्ड में सड़क सुरक्षा नियमों का अनुपालन बेहतर ढंग से सुनिश्चित करा सकेंगे।
दयाशंकर सिंह ने बताया कि सरकार ने दोपहिया वाहन खरीदने पर डीलर पॉइंट से दो हेलमेट देना अनिवार्य कर दिया है।इसके साथ ही ‘नो हेलमेट, नो फ्यूल’ की व्यवस्था लागू की गई है, ताकि दोपहिया चालकों को सुरक्षा के प्रति गंभीर बनाया जा सके। इस दौरान लोगों से अपील की कि वह हेलमेट स्वयं भी पहनें और पीछे बैठने वाले व्यक्ति को भी अनिवार्य रूप से पहनाएं। चार पहिया वाहन चालकों से सीट बेल्ट लगाने और ओवरस्पीडिंग, गलत दिशा में वाहन चलाने तथा शराब पीकर वाहन चलाने से बचने को कहा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रवर्तन का उद्देश्य केवल जुर्माना लगाना नहीं बल्कि लोगों को सावधान करके सुरक्षित घर पहुंचाना है। मंत्री ने परिवहन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि ड्राइविंग लाइसेंस, ट्रैफिक नियमों और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए और किसी भी स्तर पर ढील न दी जाए।
वहीं परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने एक्सप्रेस-वे पर होल्डिंग एरिया व डोरमेट्री बनाने की जरूरत बताते हुए कहा कि इससे लंबी दूरी तय करने वाले चालकों को ठहरने की सुविधा मिलेगी। उन्होंने दुर्घटना के बाद घायलों को समय से उपचार दिलाने के लिए प्रत्येक सौ किमी पर ट्रामा सेंटर स्थापित करने का भी सुझाव दिया।
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इस दौरान दयाशंकर सिंह ने टी-प्वाइंट और ग्रामीण संपर्क मार्गों पर ब्रेकर, साइनेज और रोड सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने पर भी जोर दिया। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव परिवहन अर्चना अग्रवाल, प्रमुख सचिव पीडब्लूडी अजय चौहान और परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने भी रोड सेफ्टी में विभागीय समन्वय, प्रवर्तन और जागरूकता की आवश्यकता पर विचार रखे।
लम्बी यात्रा की दूरी वाली बसों में दो ड्राइवर पर विचार
इस मौके पर अपर मुख्य सचिव परिवहन अर्चना अग्रवाल ने हा कि एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए सबसे अधिक सड़क ट्रांसपोर्टेशन का इस्तेमाल किया जाता है। राज्य सरकार द्वारा सड़कों पर सुरक्षा के सभी इंतजाम किये जा रहे हैं। सभी स्टेक होल्डर और विभागों के मिले-जुले प्रयास से ही सड़क सुरक्षा को और बेहतर किया जा सकता है। परिवहन निगम लम्बी यात्रा की दूरी वाली बसों में दो ड्राइवर के विकल्प पर काम कर रही है, इससे दुर्घटनाओं को रोकने में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने पैदल यात्रियों एवं दो पहिया वाहनों को सड़क पर अधिक स्पेस देने पर बल दिया।
चार तरीकों से हो सकता है रोड एक्सीडेंट मिनिमाइज
वहीं प्रमुख सचिव पीडब्लूडी अजय चौहान ने कहा कि पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग एवं मीडिया के सामूहिक प्रयास से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि चार महत्वपूर्ण बिन्दुओं 04-ई (एजूकेशन, एनफोर्समेंट, इन्जीनियरिंग एवं इमेरजेंसी केयर) के माध्यम से रोड एक्सीडेंट को मिनिमाइज किया जा सकता है।
प्रवर्तन टीम लगातार फील्ड में काम कर रही
साथ ही परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से सड़क सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं से परिवहन विभाग के अधिकारियों को जोड़ने का लक्ष्य है, ताकि फील्ड में जाकर सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक कर सके। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन टीम लगातार फील्ड में काम कर रही है। परिवहन विभाग द्वारा ओवरलोड एवं ओवर स्पीड वाले वाहनों का चालान किया जा रहा है। सड़क सुरक्षा से संबंधित गीत को जिला प्रशासन के माध्यम से चलवाया जा रहा है एवं स्कूलों में भी सड़क सुरक्षा के कार्यक्रम आयोजित कराये जा रहे हैं।




















