आरयू वेब टीम। शंकराचार्य स्वामी अविमुश्वरानंद व उनके शिष्यों के साथ प्रयागराज माघ मेले में हुई अभद्रता पर विपक्ष के साथ ही अब मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा नेता उमा भारती ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिससे यह साफ है कि अब भाजपा के अंदर भी इस मुद्दे को लेकर मतभेद सामने आ गए हैं। उमा भारती ने प्रशासन के द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य होने का सबूत मांगने की कड़ी आलोचना कर कहा कि यह कदम प्रशासन के अधिकारों और मर्यादाओं का उल्लंघन है।
उमा भारती ने आज अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्टकर कहा कि, “मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा, किंतु प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांगना-यह प्रशासन ने अपनी मर्यादाओं एवं अधिकारों का उल्लंघन किया है। यह अधिकार तो सिर्फ शंकराचार्यों का एवं विद्वत परिषद का है।”
दूसरी ओर इस विवाद के बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट कर दिया कि उनका धरना तब तक जारी रहेगा जब तक उन्हें ससम्मान संगम स्नान करने का अधिकार नहीं मिलता। पिछले दस दिन से प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद का धरना जारी है। उन्होंने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि ये विरोध लगातार जारी रहेगा। माघ मेला पूरा होने पर हम वापस जाएंगे और अगली बार फिर से प्रयागराज में धरने पर बैठेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा शिविर प्रवेश तभी होगा, जब हमारा ससम्मान संगम स्नान होगा।
यह भी पढ़ें- शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से दुर्व्यवहार के विरोध में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने दिया इस्तीफा, लेटर वायरल
बता दें कि 17 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रयागराज मेघा मेला में संगम घाट पर स्नान करने पहुंचे थे। पूरे लाव-लश्कर के साथ वह अपनी पालकी पर आए थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें बिना रथ के आगे बढ़ने को कहा। इसी बात पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला व्यवस्था में जुटे कर्मचारियों के बीच विवाद हुआ था। बाद में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उनके साथ यह व्यवहार जानबूझकर किया गया है। विवाद उस समय और बढ़ा, जब अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में ही धरने पर बैठ गए।




















