आरयू इंटरनेशनल डेस्क। ईरान-अमेरिका के बीच बुधवार को सीजफायर की घोषणा हुई। सीजफायर के 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि लेबनान में इजरायल के हमलों में 182 लोगों की मौत हो गई। इजरायली स्ट्राइक के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद कर दिया है। जिसके बाद अमेरिका के साथ तनाव फिर से बढ़ गया है। इस घटनाक्रम से हाल में हुआ युद्धविराम भी खतरे में पड़ गया है।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका और इजराइल ने यह दावा करके शर्तों से मुकर गए हैं कि लेबनान युद्धविराम समझौते में शामिल नहीं था। जबकि ईरान ने शांति के लिए अमेरिका के सामने जोदस सूत्रीय प्लान रखा था, उसमें लेबनान का भी जिक्र था। तेहरान ने कहा था कि लेबनान सहित सभी मोर्चों पर दुश्मनी खत्म की जाए, लेकिन अमेरिका ने अब कहा है कि सीजफायर डील में लेबनान शामिल नहीं था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि लेबनान सीजफायर समझौते का हिस्सा नहीं है।
वहीं ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा कि प्रस्तावित वार्ता “अतार्किक” है क्योंकि अमेरिका ने युद्ध विराम की शर्तों का उल्लंघन किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कहा कि लेबनान में संघर्ष खत्म करना युद्धविराम का हिस्सा था, जबकि इजराइल और अमेरिका ने इससे इनकार किया है।
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व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने जलडमरूमध्य बंद करने को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया और इसे फिर खोलने की मांग दोहराई। समझौते की शर्तों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
दरअसल इजराइल ने लेबनान में हिजबुल्ला के खिलाफ हमले तेज कर दिए हैं। बेरूत में व्यावसायिक और रिहायशी इलाकों पर हमले किए गए। इन हमलों में बुधवार को कम से कम 182 लोगों की मौत हुई।




















