आरयू वेब टीम। सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का नहीं, बल्कि विजय, सृजन और पुनर्निर्माण का इतिहास है। आक्रांता आते रहे, लेकिन हर युग में सोमनाथ फिर से स्थापित हुआ। इतनी सदियों का संघर्ष, धैर्य और पुनर्निर्माण की यह जीवट शक्ति विश्व इतिहास में दुर्लभ उदाहरण है। आज भी सोमनाथ महादेव के मंदिर पर फहराती ध्वजा ये उद्घोष कर रही है कि हिंदुस्तान की शक्ति और सामर्थ्य क्या है, और यहां का कण-कण वीरता और साहस का साक्षी है।
उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत आयोजित शौर्य सभा को संबोधित कर कही। साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा, ‘महमूद गजनी से लेकर औरंगजेब तक हमले कर रहे थे, लेकिन वो भूल गए थे कि सोमनाथ के नाम में सोम यानी अमृत है। ऐसे में जब-1जब इसे नष्ट करने की कोशिश हुई तो साेमनाथ मंदिर उठ खड़ हुआ। मोदी ने कहा कि मजहबी आततायी इतिहास के पन्नों में सिमट गए तो वहीं साेमनाथ मंदिर आज भी स्वाभिमान से खड़ा है।’
साथ ही कहा कि एक हजार साल पहले, इसी जगह पर क्या माहौल रहा होगा। आप जो यहां उपस्थित हैं, उनके पुरखों ने हमारे पुरखों ने जान की बाजी लगा दी थी। अपनी आस्था के लिए अपने विश्वास के लिए और अपने महादेव के लिए उन्होंने अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। उन्होंने आगे कहा कि हजार साल पहले वे आततायी सोच रहे थे कि उन्होंने हमें जीत लिया, लेकिन आज एक हजार साल बाद भी सोमनाथ महादेव के मंदिर पर फहरा रही ध्वजा पूरी सृष्टि का आह्वान कर रही है कि हिंदुस्तान की शक्ति क्या है, उसका सामर्थ्य क्या है।
इस दौरान पीएम मोदी ने बिना नाम लिए विपक्ष पर निशाना साधता हुए कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का इतिहास नहीं है बल्कि ये इतिहास विजय और पुनर्निर्माण का है। भारत के पास सोमनाथ जैसे हजारों साल पुराने पुण्य स्थल हैं। ये स्थल हमारे सामर्थ्य, प्रतिरोध और परंपरा के पर्याय रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्य से आजादी के बाद गुलामी की मानसिकता वाले लोगों ने इनसे पल्ला झाड़ने का कोशिश की। उस इतिहास को भुलाने के कुत्सित प्रयास किए गए।
‘महादेव का आशीर्वाद’
पीएम मोदी ने कहा कि मैंने देखा कल रात 1,000 ड्रोन द्वारा वैदिक गुरुकुलों के 1,000 विद्यार्थियों की उपस्थिति और सोमनाथ के 1,000 वर्षों की गाथा का प्रदर्शन किया गया और आज 108 अश्वों के साथ मंदिर तक शौर्य यात्रा, मंत्रों और भजनों की अद्भुत प्रस्तुति ये सब कुछ मंत्र-मुग्ध कर देने वाला है। साथ ही कहा कि इस आयोजन में गर्व है, गरिमा है, गौरव है और इसमें गरिमा का ज्ञान भी है। इसमें वैभव की विरासत है, इसमें अध्यात्म की अनुभूति है, आनंद है, आत्मीयता है और देवाधिदेव महादेव का आशीर्वाद है।




















