HC ने तय की समय सीमा, यूपी में 2005 से पहले नियुक्त शिक्षामित्रों को मिल सकती है पुरानी पेंशन

हाईकोर्ट

आयू ब्यूरो, प्रयागराज। शिक्षामित्रों से अध्यापक बने शिक्षकों के लिए अच्छी खबर है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को पुरानी पेंशन का विकल्प भरने वाले शिक्षकों के मामले में एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने याचियों की पेंशन के मामले में दो माह के भीतर अंतिम निर्णय लिया जाए।

ये आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने अनूप कुमार सिंह व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। इस फैसले से उन हजारों शिक्षकों में उम्मीद जगी है, जो लंबे समय से पुरानी पेंशन बहाली की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान याचियों की ओर से दलील दी गई कि सरकार के 28 जून 2024 एवं 30 जुलाई 2025 के शासनादेशों के तहत उन्हें पुरानी पेंशन के लिए विकल्प पत्र दिया गया था।

याचियों का दावा है कि उन्होंने निर्धारित प्रारूप में अपना विकल्प संबंधित अधिकारियों के पास जमा करा दिया है, लेकिन उस पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। सरकारी वकील ने याचियों की इस मांग पर किसी भी प्रकार की कानूनी आपत्ति दर्ज नहीं कराई। इसके बाद अदालत ने मामले की गंभीरता को समझते हुए सचिव को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने तथ्यों और पक्षकारों की दलीलों को सुनने के बाद याचिका का निस्तारण करते हुए उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को विशेष जिम्मेदारी सौंपी है।

सचिव को निर्देशित किया गया है कि वे याचियों के दावे पर नियमानुसार विचार करें और उन्हें सुनवाई का समुचित अवसर प्रदान करें। ये पूरी प्रक्रिया दो माह के भीतर पूरी कर निर्णय लेना अनिवार्य किया गया है। यह मामला उन विशिष्ट शिक्षकों से जुड़ा है जिनका चयन 2005 तक बतौर शिक्षा मित्र हुआ था और जो बाद में सीधी भर्ती के जरिए अध्यापक बने हैं।

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दरअसल साल 2005 तक चयनित ऐसे शिक्षा मित्र जो बाद की सीधी भर्तियों में सहायक अध्यापक बन गए हैं, उन्होंने पुरानी पेंशन के लिए विकल्प पत्र भरा है जिस पर अब शासन को अंतिम मुहर लगानी है। इन याचियों का तर्क है कि उनकी शुरुआती नियुक्ति 2005 से पहले की है, इसलिए वे पुरानी पेंशन के हकदार हैं। कोर्ट के इस हस्तक्षेप के बाद अब बेसिक शिक्षा विभाग को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। इस निर्णय का असर उत्तर प्रदेश के शिक्षा जगत से जुड़े हजारों परिवारों की आर्थिक सुरक्षा पर पड़ना तय है।

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