आरयू वेब टीम। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा की कैश कांड मामले में मुश्किलें बढ़ने वालीं हैं। उनके खिलाफ लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला ने मंगलवार को महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जानकारी के मुताबिक इस प्रस्ताव पर कुल 146 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के नेता शामिल हैं।
इसके लिए लोकसभा स्पीकर ने एक जांच कमेटी भी बनाई है। इस कमेटी में शामिल जजों का नाम भी घोषित कर दिया गया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की बनाई हुई जांच कमेटी में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के एक-एक जज को शामिल किया गया है। वहीं एक कानूनविद भी कमेटी में शामिल है। जांच कमेटी की रिपोर्ट आने तक महाभियोग का प्रस्ताव लंबित रहेगा।
वहीं कमेटी की बात करें तो इसमें सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, कर्नाटक हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट बीबी आचार्य और मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव को शामिल किया गया है।
दरअसल इस साल 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लग गई थी। वे तब दिल्ली हाईकोर्ट में थे। जानकारी मिलने के बाद दिल्ली फायर सर्विस की टीम उनके घर पहुंची। फायरब्रिगेड ने आग पर तो काबू पा लिया, लेकिन इसके बाद चौंकाने वाला नजारा देखने को मिला. जस्टिस वर्मा के स्टोर रूम से 500-500 रुपए के जले हुए नोटों के बंडल मिले, जो कि बोरे में भरकर रखे गए थे.
ये है महाभियोग प्रस्ताव
किसी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में से किसी में भी महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है। महाभियोग प्रस्ताव सबसे पहले राज्यसभा के सभापति या लोकसभा स्पीकर के सामने पेश किया जाता है। फिर प्रस्ताव की जांच के लिए कमेटी का गठन किया जाता है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के जज, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और विशिष्ट विधि विशेषज्ञ को शामिल किया जाता है।




















