केंद्र सरकार पर निशाना साध केजरीवाल ने कहा, पंजाब का ही रहेगा चंडीगढ़

केजरीवाल को कोरोना

आरयू वेब टीम। आने वाले शीतकालीन सत्र में केंद्र सरकार प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) को पास करा सकती है। जिसको लेकर पंजाब में विरोध होने लगा है, पंजाब की आम आदमी अब इसके खिलाफ केंद्र सरकार के सामने आ गई है। आप सुप्रीमो केजरीवाल ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चंडीगढ़ पंजाब का है और पंजाब का रहेगा। वहीं पंजाब मुख्यमंत्री भागवत मान ने कहा कि “संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में केन्द्र सरकार की ओर से लाए जा रहे प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) बिल का हम कड़ा विरोध करते हैं।”

केजरीवाल ने रविवार को अपने एक्स अकाउंट पर पोस्टकर कहा कि भाजपा की केंद्र सरकार द्वारा संविधान संशोधन के माध्यम से चंडीगढ़ पर पंजाब के अधिकार को खत्म करने की कोशिश किसी साधारण कदम का हिस्सा नहीं, बल्कि पंजाब की पहचान और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। फेडरल स्ट्रक्चर की धज्जियां उड़ाकर पंजाबियों के हक छीनने की यह मानसिकता बेहद खतरनाक है।

जिस पंजाब ने देश की सुरक्षा, अनाज, पानी और इंसानियत के लिए हमेशा बलिदान दिया, आज उसी पंजाब को उसके अपने हिस्से से वंचित किया जा रहा है। ये केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि ये पंजाब की आत्मा को चोट पहुंचाने जैसा है। इतिहास गवाह है कि पंजाबियों ने कभी किसी तानाशाही के सामने सिर नहीं झुकाया। पंजाब आज भी नहीं झुकेगा। चंडीगढ़ पंजाब का है और पंजाब का रहेगा।

यह भी पढ़ें- ट्रंप के सामने आत्मसमर्पण है 1.4 अरब भारतीयों का अपमान, केजरीवाल ने साधा पीएम मोदी पर निशाना

गौरतलब है कि सीएम मान ने कहा कि यह संशोधन पंजाब के हितों के विरुद्ध है। हम केंद्र सरकार की ओर पंजाब के विरुद्ध रची जा रही साजिश को कामयाब नहीं होने देंगे। हमारे पंजाब के गांवों को उजाड़कर बने चंडीगढ़ पर सिर्फ पंजाब का हक है। हम अपना हक यूं ही जाने नहीं देंगे, इसके लिए जो भी कदम उठाने पड़ेंगे, हम उठाएंगे।

क्या है 131वां संविधान संशोधन विधेयक?

131वां संविधान संशोधन विधेयक 2025 भारत सरकार की ओर से प्रस्तावित एक महत्वपूर्ण विधेयक है, जो केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) चंडीगढ़ को संविधान के अनुच्छेद 240 के दायरे में लाने का प्रयास है। अनुच्छेद 240 राष्ट्रपति को कुछ यूटीएस (जैसे दादरा-नागर हवेली, लक्षद्वीप) के लिए सीधे विनियम और कानून बनाने का अधिकार देता है, बिना विधानमंडल के। हाल में में चंडीगढ़ का प्रशासन पंजाब के राज्यपाल द्वारा किया जाता है।

यह भी पढ़ें- केजरीवाल का केंद्र सरकार पर हमला, लद्दाख का आंदोलन बन सकता है देश की लड़ाई