आठ साल पुराने बैंक फ्रॉड केस में ED ने लिया एक्शन, आरोपित प्रत्युष कुमार गिरफ्तार

बैंक घोटाले

आरयू वेब टीम। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कोलकाता ने गणेश ज्वेलरी हाउस (इंडिया) लिमिटेड से जुड़े बहुचर्चित आठ साल पुराने बैंक फ्रॉड मामले में कार्रवाई की है। ईडी ने प्रत्युष कुमार सुरेका (40 साल) को गिरफ्तार किया है। ये गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19(1) के तहत की गई है।

जानकारी के मुताबिक ईडी ने यह जांच सीबीआइ द्वारा 12 जुलाई 2016 को दर्ज एफआइआर के आधार पर शुरू की थी। इस एफआइआर में श्री गणेश ज्वेलरी हाउस और उसके प्रमोटरों पर 25 बैंकों के कंसोर्टियम से 2,672 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है। जांच में सामने आया कि साल 201112 के दौरान ज्वेलरी कारोबार के लिए लिए गए बैंक लोन को सोलर पावर प्रोजेक्ट्स में डायवर्ट किया गया। ये पैसा M/s Alex Astral Power Pvt. Ltd. और उससे जुड़ी कंपनियों के जरिए लगाया गया। प्रत्युष कुमार सुरेका को 24 अप्रैल 2012 को इस कंपनी का जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया था।

ईडी के अनुसार, करीब 400 करोड़ की लागत वाला सोलर पावर प्रोजेक्ट- जिसमें 120 करोड़ इक्विटी और 280 करोड़ का बैंक फाइनेंस शामिल था, को फर्जी तरीके से 20 करोड़ से भी कम कीमत पर ट्रांसफर किया गया। ये ट्रांसफर सुरेका के नियंत्रण वाली कंपनियों के जरिए शेम इन्वेस्टमेंट एग्रीमेंट के माध्यम से किया गया। ये ट्रांजैक्शन एक रिलेटेड पार्टी डील थी, जिसका उद्देश्य एसेट की वास्तविक वैल्यू को छिपाना और बैंकों को नुकसान पहुंचाना था।

जांच में ये भी सामने आया कि प्रत्युष सुरेका इस सोलर प्रोजेक्ट की शुरुआत से ऑपरेशन और मैनेजमेंट से जुड़े हुए थे। उनकी वास्तविक नेटवर्थ बेहद कम होने के बावजूद, सैकड़ों करोड़ की संपत्तियां सर्कुलर ट्रांजैक्शन्स, एंट्री ऑपरेटर्स, फर्जी दस्तावेजों और जटिल कॉरपोरेट ढांचे के ज़रिए उनके नियंत्रण में पहुंचाई गईं। इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से पता चला है कि कागजों पर फर्जी बिक्री दिखाने के बावजूद एसजीजेएचआइएल के प्रमोटर निलेश पारेख को उसी सोलर एसेट से कई सालों तक नकद राशि मिलती रही, जिससे अपराध की आय का उपयोग किया गया। ये कृत्य पीएमएलए की धारा तीन के तहत मनी लॉन्ड्रिंग अपराध के दायरे में आता है।

ईडी की जांच में ये भी सामने आया कि प्रत्युष सुरेका ने फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन तैयार किए, एग्रीमेंट्स को बैकडेट किया, डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग किया और डमी डायरेक्टर्स नियुक्त कर फर्जी रिकॉर्ड बनाए। इसके अलावा, Alex Astral Power Pvt. Ltd. और अन्य ग्रुप कंपनियों के फंड्स को फर्जी लोन, झूठे खर्च और सर्कुलर ट्रांजैक्शन्स के जरिए सुरेका और उनके परिवार की कंपनियों में ट्रांसफर किया गया, ताकि काले धन को सफेद दिखाया जा सके।

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ईडी के मुताबिक, कई बार मौका देने के बावजूद प्रत्युष सुरेका ने जांच में सहयोग नहीं किया और विदेश भागने की कोशिश की। बीते पांच जनवरी 2026 को उन्हें कोलकाता एयरपोर्ट पर थाईलैंड जाने की कोशिश के दौरान लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) के आधार पर रोका गया था। सबूतों से छेड़छाड़, गवाहों को प्रभावित करने, फरार होने की आशंका और अपराध की आय को लगातार ठिकाने लगाने के जोखिम को देखते हुए उनकी गिरफ्तारी की गई। मामले में आगे की जांच जारी है।

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