लाठी-डंडों से लैस आक्रोशित किसानों ने किया एलडीए का घेराव, पिटाई कर फूंका पुतला, अफसरों पर लगाया फूट डालने का आरोप

एलडीए का पुतला
एलडीए के पुतले पर अपना गुस्‍सा निकालते किसान।

आरयू ब्‍यूरो, लखनऊ। मुआवजा व चबूतरों समेत 21 सूत्रीय मांगों को लेकर आज किसानों ने लखनऊ विकास प्राधिकरण का घेराव किया। किसानों ने एलडीए को एक महाभ्रष्‍ट विभाग बताने के साथ ही अधिकारियों पर किसानों में फूट डालने का भी आरोप लगाया। इस दौरान महिलाओं ने एलडीए के पुतले पर लाठी-डंडों से अपना गुस्‍सा निकालते हुए उसे आग के हवाले कर दिया। इसके बाद जलते पुतले को प्रदर्शनकारियों ने एलडीए के गेट के अंदर ही फेंक दिया जिससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी भी मची रही।

भारतीय किसान यूनियन राष्‍ट्रीयतावादी अराजनैतिक (बीकेयूआरए) के नेतृत्‍व में सुबह से ही आज किसान एलडीए के गेट नंबर दो पर जुटने लगे थे। कुछ ही देर में लाठी-डंडों के साथ ही खेती में काम आने वाले धारदार औजार से लैस महिलाओं समेत सैकड़ों किसान वाहनों में भरकर प्राधिकरण पहुंच गए। इस दौरान आक्रोशित किसानों ने प्राधिकरण व उसके अधिकारियों के खिलाफ मुर्दाबाद समेत कई आपत्तिजनक नारे भी लगाने शुरू कर दिए।

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मामले की गंभीरता और किसानों के गुस्‍से को देखते हुए तत्‍काल एलडीए गेट को बंद कराया गया। साथ ही सूचना लगते ही गोमतीनगर व चिनहट समेत अन्‍य थानों की पुलिस, पीएसी और पुलिस के अफसर मौके पर पहुंच गए। पुलिस व एलडीए के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन किसान लिखित वादा करने की बात पर शाम तक अड़े रहें। इस बीच गेट बंद रहने के चलते आवंटियों व अन्‍य लोगों को प्राधिकरण भवन में जाने के लिए थोड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ा।

41 साल में भी नहीं सुलझा सका किसानों का मुद्दा

बीकेयूआरए के राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष अशोक यादव ने बताया कि प्राधिकरण ने 41 साल पहले गोमतीनगर के लिए उजरियांव योजना के नाम पर 25 गांवों की जमीन ली थीं, लेकिन आज तक किसानों को पूरा मुआवजा नहीं दिया गया। हर बार एलडीए के अधिकारी बस झूठा आश्‍वासन ही दे रहें। इसके अलावा चबूतरे, बारात घर, भूखंड व शमशान घाट भी देने का वादा आज तक पूरा नहीं किया है। कुछ किसानों को चबूतरे दिए भी जा रहें हैं तो दूसरी योजना में जिससे कि किसानों में ही आपस में फूट पड़ जाए।

अपना कार्यालय चमकाने में फूंक रहें करोड़ों, लेकिन…

किसान नेता ने कहा कि एलडीए मुख्‍यालय का हाल देखकर तो लग रहा प्राधिकरण के अधिकारी अपना कार्यालय चमकाने में तो जनता का करोड़ों रुपया आंख बंदकर फूंक रहें, लेकिन गोमतीनगर के ही गुलाम हुसैन पुरवा व रिसहा गांव में आजादी के 78 साल बीतने के बाद भी पानी नहीं पहुंच सका है, उनके गांवों में लाइट की समुचित व्‍यवस्‍था नहीं है, संवेदनहीन व लापरवाह अधिकारियों को इस बात की चिंता नहीं है।

ट्यूबवेल है, पानी की सप्‍लाई नहीं

अशोक यादव ने कहा कि गुलाम हुसैन पुरवा गांव में एक ट्यूबवेल 25 साल पहले लगा भी है तो जलकल विभाग कहता है कि प्राधिरण ने यह ट्यूबवेल उन्‍हें हैंडओवर नहीं किया है, इसलिए वह पानी की सप्‍लाई नहीं कर सकता।

सीएम जानेंगे तो जाएगी अधिकारियों की कुर्सी

प्रदर्शनकारियों का यह भी आरोप था कि अधिकारी उन लोगों को सूबे के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ तक भी नहीं पहुंचने दे रहें, सीएम अगर उन लोगों की समस्‍याएं और एलडीए अधिकारियों की कार्यप्रणाली, मंशा और संवेदनहीनता से अवगत हो जाएंगे तो प्राधिकरण के कई अफसरों की कुर्सी चली जाएगी।

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किसानों का प्रदर्शन
प्राधिकरण के गेट पर नारेबाजी करते प्रदर्शनकारी।