आरयू ब्यूरो, लखनऊ। पुलिस के बल प्रयोग कर स्नान से रोकने से उठा प्रयागराज माघ मेला प्रशासन और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच का विवाद लगातार बढ़ रहा है। प्रयागराज मेला प्रशासन द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस जारी करने के बाद अब स्वामी ने अब मेला प्रशासन को आठ पेज का जवाब भेजा है। जिसमें उन्होंने न सिर्फ शंकराचार्य होने का दावा किया है, बल्कि मेला प्रशासन को चेतावनी भी दी है कि अगर 24 घंटे के अंदर नोटिस वापस नहीं लिया गया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अपने सम्मान की लड़ाई लड़ रहे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्रा के जरिए अथॉरिटी को भेजे आठ पेज के जवाब में मेला प्रशासन के आरोपों को साफ तौर पर नकारते हुए कहा है कि वह शंकराचार्य हैं। कानूनी नोटिस में कहा गया है कि शंकराचार्य पद को लेकर पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। ऐसे में प्रशासन का हस्तक्षेप कोर्ट की गरिमा को चुनौती देने जैसा है। प्रशासन की यह हरकत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। यदि प्रशासन अपना पत्र वापस नहीं लेता है, तो उनके खिलाफ मानहानि और अवमानना की कानूनी कार्यवाही शुरू की जाएगी।
नोटिस में ये भी कहा गया है कि प्रशासन ने 19 जनवरी की रात को पुलिस बल के साथ शिविर के प्रवेश द्वार पर नोटिस चस्पा की थी। उस दौरान शंकराचार्य सो रहे थे। इससे ‘जगद्गुरु शंकराचार्य’ संस्था का अनादर और अपमान हुआ है। साथ ही बताया कि स्वर्गीय शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने अपने जीवनकाल में ही उन्हें अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का 11 सितंबर, 2022 को निधन हो गया और 12 सितंबर, 2022 को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार औपचारिक रूप से शंकराचार्य के रूप में प्रतिष्ठित किया गया। उन्हें एक सार्वजनिक समारोह में शंकराचार्य के रूप में स्थापित किया गया था।
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साथ ही ये भी बताया गया कि अभिषेक पहले ही हो चुका है, यह बात 14 अक्टूबर, 2022 के आदेश में दर्ज है। इसके अलावा, शंकराचार्य के रूप में उनके बने रहने पर किसी भी कोर्ट से कोई स्टे ऑर्डर नहीं है। जवाब में श्रृंगेरी, द्वारका और पुरी पीठों के शंकराचार्यों का समर्थन होने का भी दावा किया गया है।
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जवाब में भारत धर्म महामंडल द्वारा मान्यता का भी उल्लेख किया गया है और कहा गया है कि स्वर्गीय शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की रजिस्टर्ड वसीयत वैध है। गुजरात हाई कोर्ट ने वसीयत को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। ये जानकारी नोटिस के जवाब में दी गई थी। इतना ही नहीं, विरोधी पक्ष के बयानों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया गया था, जिसके बाद विरोधी पक्ष द्वारा दायर याचिका को बाद में वापस ले लिया गया था।




















