आरयू ब्यूरो, लखनऊ। प्राइवेट कंपनियों को रेवड़ी की तरह अपने पार्क व अन्य संपत्तियां बांटने के बाद सो रहा लखनऊ विकास प्राधिकरण अब जाग गया है। आज इसी क्रम में एलडीए ने अपना ही हुसैनाबाद फूड कोर्ट एकाएक सील कर लोगों को चौंका दिया। दरअसल एलडीए ने यह कार्रवाई फूड कोर्ट का संचालन करने वाली कंपनी से अपने 93 लाख रुपये की वसूली के लिए किया है।
दस करोड़ खर्च के बाद बढ़ाया भी तो दो सौ!
बताते चलें कि एलडीए ने साल 2024 में इस फूड कोर्ट के निर्माण में दस करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किया था। बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर छह दुकानें व फर्स्ट फ्लोर पर दो बड़े रेस्टोरेंट बनें हैं। प्राधिकरण ने फूड कोर्ट के संचालन के लिए सालाना बेस प्राइस 75 लाख तय किया था। जिसके बाद प्राधिकरण के इंजीनियर-अधिकारियों ने बेस प्राइस में मात्र दो सौ रुपये की बढ़ोतरी करते हुए 75 लाख 200 की सालाना लीज दर पर फूड कोर्ट को संचालन-अनुरक्षण के लिए अमरावती इंटरप्राइजेज के हवाले कर दिया था।
आंख के साथ कलम भी बंद किये बैठे रहें जिम्मेदार
कागजों के अनुसार फूड कोर्ट को पांच साल के लिए संस्था को हैंडओवर करने की प्रक्रिया सात दिसंबर 2024 को पूरी की गयी थी और संस्था को हर तीन महीने पर एलडीए को तय पैसा देना था, लेकिन लंबे समय तक ऐसा नहीं हो सका। कई किश्त बकाया होने पर भी एलडीए के जिन अफसर-इंजीनियर के कंधों पर वसूली की जिम्मेदारी थीं वह अपनी आंख के साथ कलम भी बंद किये बैठे रहे। वीसी प्रथमेश कुमार ने फूड कोर्ट का निरीक्षण किया तो मामला सामने आया। जिसके बाद आज सिर्फ अपने ही फूड कोर्ट पर कार्रवाई की गयी है।
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सीलिंग के बाद एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने मीडिया को बताया कि तय नियम-शर्तों के अनुसार संस्था को हर साल करीब 75 लाख रूपये प्राधिकरण कोष में जमा करने हैं। लेकिन, संस्था द्वारा वित्तीय अनियमित्ता करते हुए लीज की पूरी धनराशि जमा नहीं की।
एक करोड़ 16 लाख की जगह जमा किया 22 लाख
वीसी ने कहा कि गुरुवार को फूड कोर्ट निरीक्षण के दौरान समीक्षा की गयी तो पता चला कि संस्था को लगभग एक करोड़ 15 लाख 92 हजार जमा करने थे। जिसके सापेक्ष उसने सिर्फ 22 लाख 50 हजार ही जमा कराया और शेष लगभग 93 लाख एलडीए का बकाया है।
इस पर संस्था के खिलाफ नोटिस जारी की गयी है। साथ में बकाया धनराशि जमा होने तक फूड कोर्ट को अस्थायी रूप से सील कर दिया गया है। सीलिंग के चलते सभी फूड कोर्ट में संचालित दुकानों और व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। दूसरी ओर संस्था का कहना है कि उसे कोई नोटिस नहीं दी गयी है।
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सूत्रों की मानें तो फूड कोर्ट का मामला तो एक बानगीभर है। प्राधिकरण के इंजीनियर-अफसरों ने अपनी चहेती कंपनियों को विभाग की संपत्तियों पर करोड़ों खर्च करने के बाद पी.पी.पी.-आर.एफ.पी. जैसे जाल में लपेटकर औने-पौने दर पर सौंप दी है। जिनमें से अधिकतर कंपनियों पर प्राधिकरण का लंबा बकाया है।
डालीगंज चौराहे की री-मॉडलिंग में देरी पर फटकार
वहीं आज उपाध्यक्ष ने डालीगंज चौराहे की री-मॉडलिंग के कार्य का भी मुआयना किया है। निरीक्षण के दौरान काम की प्रगति धीमी पायी गयी, जिससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस पर उपाध्यक्ष ने ठेकेदार को कड़ी फटकार लगाते हुए एक महीने के अंदर काम पूरा करने का निर्देश दिया है। साथ ही चेतावनी भी दी है कि अगर निर्धारित अवधि में काम पूरा नहीं होगा तो ठेकेदार पर जुर्माना लगाया जाएगा।
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22 फरवरी तक पूरा होगा हुसैनाबाद म्यूजियम
लखनऊ के हुसैनाबाद में तैयार हो रहा म्यूजियम अगले महीने से लोगों के लिए खुल जाएगा। एलडीए ने म्यूजियम को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने आज निर्माणाधीन म्यूजियम का भी निरीक्षण किया। उन्होंने निर्देश दिये कि 22 फरवरी तक सभी बाकी काम पूरा करा लिये जाएं, जिसके बाद म्यूजियम को लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।
यह म्यूजियम लखनऊ में आने वाले पर्यटकों के लिए बेहद खास होगा और लोग यहां लखनऊ के अलावा प्रदेश के प्रमुख स्थानों व महत्वपूर्ण धरोहरों के बारे में जानकारी जुटा सकेंगे।




















