SIR के खिलाफ सीएम ममता बनर्जी ने खुद रखी सुप्रीम कोर्ट में दलील, मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को किया कटघरे में खड़ा

ममता बनर्जी
वकीलों के साथ सुप्रीम कोर्ट पहुंची ममता बनर्जी।

आरयू वेब टीम। सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को चुनौती देने वाली अपनी रिट याचिका में खुद अदालत के सामने दलीलें रखीं। ये पहली बार है जब किसी कार्यरत मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुतियां देते हुए देश के मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को ही कटघरे में खड़ा कर दिया।

ममता बनर्जी ने कहा कि एसआइआर की प्रक्रिया “शामिल करने के लिए नहीं, बल्कि नाम हटाने के लिए” की जा रही है। उन्होंने कहा कि शादी के बाद पति का उपनाम अपनाने वाली महिलाएं, जो ससुराल चली जाती हैं, नामों में असंगति बताकर मतदाता सूची से हटाई जा रही हैं। सुनवाई के अंत में, खंडपीठ ने ममता बनर्जी की याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया और अगले सोमवार तक जवाब मांगा।

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पश्चिम बंगाल की सीएम ने कहा कि समस्या ये है कि हमारे वकील तो केस लड़ते हैं और हम शुरू से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन जब सब कुछ खत्म हो जाता है, जब हमें न्याय नहीं मिलता, जब न्याय दरवाजे के पीछे रो रहा होता है।तब हमने सोचा कि कहीं भी न्याय नहीं मिल रहा। मैंने चुनाव आयोग को सभी विवरणों के साथ पत्र लिखे, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। मैं एक बंधुआ मजदूर जैसी स्थिति में हूं। मैं कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति नहीं हूं, एक सामान्य परिवार से आती हूं, और मैं अपनी पार्टी के लिए नहीं लड़ रही हूं”।

इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि पश्चिम बंगाल में एसआइआर से संबंधित कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें अदालत ने कई वरिष्ठ वकीलों की दलीलें विस्तार से सुनी हैं। उन्होंने बताया कि 19 जनवरी को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल द्वारा मुद्दे उठाए जाने के बाद अदालत ने लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी (एलडी) सूची के पारदर्शी सत्यापन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे।

…निर्देशों का पालन नहीं कर रहा

ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट के आधार कार्ड स्वीकार करने के निर्देशों का पालन नहीं कर रहा है, जबकि अन्य राज्यों में आधार स्वीकार किया जा रहा है। इस पर सीजेआइ ने कहा कि आधार कार्ड की अपनी सीमाएं हैं और चूंकि एसआइआर की वैधता पर निर्णय सुरक्षित है, इसलिए वे इस मुद्दे पर अधिक टिप्पणी नहीं कर सकते।

सिर्फ बंगाल को चुनाव से पहले बनाया निशाना

इसके बाद ममता बनर्जी ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया राज्य चुनावों से पहले केवल पश्चिम बंगाल को निशाना बनाने के लिए की जा रही है।सिर्फ बंगाल को चुनाव से ठीक पहले निशाना बनाया गया है। 24 साल बाद अचानक दो महीने में ऐसा काम करने की क्या जल्दी थी, जो दो साल लेता? त्योहारों और फसल के मौसम में लोगों को नोटिस देकर परेशान किया जा रहा है। सौ से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। बीएलओ पत्र लिखते-लिखते मर गए, कई अस्पताल में भर्ती हैं। बंगाल को टार्गेट किया जा रहा है। फिर असम क्यों नहीं? नॉर्थ ईस्ट क्यों नहीं?”

भाजपा से जुड़े 8,000 ‘माइक्रो ऑब्जर्वर’ नियुक्त

साथ ही सीएम ने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े 8,000 ‘माइक्रो ऑब्जर्वर’ नियुक्त किए गए हैं, जो बीएलओ के अधिकारों को दरकिनार कर नाम हटवा रहे हैं। 58 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं। जीवित लोगों को मृत घोषित किया जा रहा है। केवल बंगाल में माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं। वे बंगाल के लोगों को कुचलना चाहते हैं”।
वहीं ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर अनौपचारिक निर्देश व्हाट्सएप के जरिए देने का आरोप लगाते हुए उसे “व्हाट्सएप आयोग” कहा। इस पर सीजेआइ ने कहा कि अदालत ये निर्देश देगी कि सभी आदेश केवल बीएलओ द्वारा अधिकृत हों।

सीजेआइ का ईसीआइ के वकील को निर्देश

सुनवाई के अंत में खंडपीठ ने ममता बनर्जी की याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया और अगले सोमवार तक जवाब मांगा। माइक्रो ऑब्जर्वरों के मुद्दे पर अदालत ने कहा कि यदि राज्य सरकार एसआइआर कार्य के लिए ग्रुप-बी अधिकारियों की सूची उपलब्ध कराती है, तो माइक्रो ऑब्जर्वरों को हटाया जा सकता है। सीजेआइ ने ईसीआइ के वकील को निर्देश दिया कि नाम की वर्तनी में मामूली अंतर के मामलों में सुनवाई नोटिस जारी न किए जाएं।

…शत्रुतापूर्ण माहौल

इस बीच सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य में चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ “शत्रुतापूर्ण माहौल” है और उन्होंने सनातन संसद द्वारा दायर एक पीआइएल को भी इस मामले के साथ सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया, जिसे पीठ ने स्वीकार कर लिया।

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