सुप्रीम कोर्ट की व्हाट्सएप-मेटा को फटकार, ‘कानून नहीं मान सकते तो भारत से निकल जाएं’

सुप्रीम कोर्ट

आरयू वेब टीम। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को व्हाट्सएप और मेटा को नागरिकों की निजता से खिलवाड़ करने के लिए कड़ी फटकार लगाई। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर वह भारत के संविधान और कानून को नहीं मान सकते तो भारत से निकल जाएं। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक और व्हाट्सएप को कड़ी फटकार लगाई। दरअसल सुप्रीम कोर्ट में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआइ) के उस आदेश के खिलाफ उनके अपीलों पर सुनवाई की, जिसमें उनकी गोपनीयता नीति को लेकर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

सुनवाई की शुरुआत में केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी ‘शोषणकारी’ है, क्योंकि यह न केवल यूजर्स का डेटा साझा करती है बल्कि उसे व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल भी करती है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बेहद कठोर शब्दों में कहा, ‘अगर हमारे संविधान का पालन नहीं कर सकते तो भारत छोड़कर जाइए। हम किसी भी नागरिक की प्राइवेसी से समझौता नहीं होने देंगे।’ सीजेआइ ने व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी को बेहद चालाकी से तैयार किया गया दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा, ‘आपकी पॉलिसी ऐसी है कि एक गरीब बुजुर्ग महिला, सड़क किनारे वेंडर, या केवल तमिल बोलने वाली महिला-क्या आपकी मंशा समझ पाएगी?

सीजेआइ ने आगे कहा कि आप यहां सर्विस देने के लिए हैं, डेटा इकट्ठा कर शेयर करने के लिए नहीं। कभी‑कभी हमें भी आपकी पॉलिसी समझने में दिक्कत होती है- तो बिहार के ग्रामीण हिस्सों में रहने वाले लोग क्या समझेंगे? सीजेआइ ने स्पष्ट किया कि अदालत यूजर्स की निजता और सूचित सहमति पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं करेगी। सुनवाई के दौरान सीजेआइ सूर्यकांत ने एक व्यक्तिगत उदाहरण देते हुए कहा, ‘डॉक्टर व्हाट्सऐप पर तीन दवाइयां भेजते हैं और पांच मिनट के भीतर उसी दवा से जुड़े विज्ञापनों की बाढ़ आ जाती है।’

वहीं इस मामले पर सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भी गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि डीपीडीपी एक्ट सिर्फ प्राइवेसी की बात करता है, लेकिन हम यहां यूजर्स की बिहेवियरल टेंडेंसीज को लेकर चिंतित हैं। आप लोगों के डिजिटल फुटप्रिंट का इस्तेमाल ऑनलाइन विज्ञापन के लिए कर रहे हैं। दुनियाभर में ऐसी कंपनियों पर गहन और इनोवेटिव निगरानी की जरूरत है।

इसपर व्हाट्सऐप के वकील ने अदालत को बताया कि कंपनी ने अपनी प्राइवेसी पॉलिसी को अन्य देशों के अनुरूप कर दिया है। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किया। केस को तीन‑जजों की बेंच के सामने सुनवाई के लिए भेजने का आदेश दिया।

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बता दें कि आइसीसीआइ ने नवंबर 2024 में व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी को प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन मानते हुए 213 करोड़ का जुर्माना लगाया था। आरोप लगा कि व्हाट्सऐप ने डॉमिनेंट पोजिशन का दुरुपयोग किया और यूजर्स को नई पॉलिसी स्वीकार करने के लिए मजबूर किया। एनसीएलएटी (जनवरी 2025) ने ‘डॉमिनेंस दुरुपयोग’ वाला निष्कर्ष तो हटाया, लेकिन 213 करोड़ का जुर्माना बरकरार रखा। इसी विरोधाभास को चुनौती देते हुए मेटा सुप्रीम कोर्ट पहुंची है।

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