आरयू ब्यूरो, लखनऊ। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्यता के खिलाफ लखनऊ समेत प्रदेशभर के शिक्षक मशाल जुलूस निकालेंगे। अपने आंदोलन को और तेज करने के लिए आज लखनऊ रणनीति तय की गयी है। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ से जुड़े संगठनों ने मशाल जुलूस के लिए राजभवन के सामने बैठक आयोजित कर हुंकार भरी है।
बैठक में मौजूद अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के संगठनों के पदाधिकारियों व प्रतिनिधियों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता के विरोध में चल रहे प्रदर्शन के पहले चरण “शिक्षा की पाती अभियान” की सफलता पर हर्ष व्यक्त करने के साथ ही लखनऊ सहित समस्त प्रदेशभर के शिक्षकों के प्रति आभार प्रकट किया। साथ ही दूसरे चरण के तहत अगामी 13 अप्रैल को निकलने वाले मशाल जुलूस को लेकर व्यापक विचार-विमर्श किया गया तथा ब्लॉक स्तर से लेकर जिला स्तर तक इसकी सफलता हेतु रणनीति बनाई गई।
टीईटी की अनिवार्यता थोपना न केवल अन्यायपूर्ण…
बैठक में कहा गया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 से पूर्व सेवा में कार्यरत शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता थोपना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि उनके दीर्घकालिक सेवा-अधिकारों और सम्मान पर भी सीधा प्रहार है।
प्रदेश सहसंयोजक विक्रमादित्य मौर्य ने आज मीडिया से कहा है अगर सरकार और संबंधित अधिकारी समय रहते शिक्षकों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेते तो आंदोलन को और अधिक व्यापक व निर्णायक स्वरूप दिया जाएगा।
जिला संयोजक वीरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि पहले चरण ‘शिक्षा की पाती अभियान’ को जिस व्यापक जनसमर्थन और शिक्षक सहभागिता मिली है, उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षक समाज अब चुप बैठने वाला नहीं है, क्योंकि शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता को पूर्व प्रभाव से लागू करना सेवा में कार्यरत शिक्षकों के संवैधानिक और नैतिक अधिकारों के विपरीत है।
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जिला संयोजक सुरेश जायसवाल ने कहा यह आंदोलन किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि लाखों शिक्षकों के सम्मान, सेवा-सुरक्षा और न्याय का आंदोलन है। इसी क्रम में जिला संयोजक लल्ली सिंह ने कहा कि 13 अप्रैल 2026 का मशाल जुलूस केवल विरोध का प्रतीक नहीं होगा, बल्कि यह शिक्षक अस्मिता, एकजुटता और संघर्ष का प्रज्वलित संकल्प बनेगा।”
जिला संयोजक विनीत सिंह ने कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता को पूर्व सेवा शिक्षकों पर थोपना अन्यायपूर्ण, अव्यावहारिक और शिक्षकों के सम्मान के खिलाफ है। एक अन्य जिला संयोजक अवधेश कुमार ने कहा कि 13 अप्रैल 2026 का मशाल जुलूस शिक्षक अस्मिता, सेवा सुरक्षा और न्याय की मांग को सरकार तक मजबूती से पहुंचाने का ऐतिहासिक माध्यम बनेगा।
बैठक में निकला निष्कर्ष
बैठक में सभी घटक संगठनों ने एक स्वर में कहा कि अब समय आ गया है कि पुरानी सेवा शर्तों, शिक्षक गरिमा और संवैधानिक न्याय की रक्षा के लिए संघर्ष को और अधिक संगठित, सशक्त और जनपक्षीय बनाया जाए।
सभी जनपद संयोजकों, सह-संयोजकों, ब्लॉक इकाइयों और शिक्षकों से अपील की गई कि वे 13 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित मशाल जुलूस को ऐतिहासिक बनाने हेतु पूर्ण तैयारी के साथ सहभागिता सुनिश्चित करें।
बैठक में प्रकाश चंद्र तिवारी, आशुतोष मिश्रा, बृजेश कुमार मौर्य, दिनेश कुमार सिंह, अलका राजवंशी, शालिनी मिश्रा, अर्पण गुप्ता, मोहम्मद रियाज, मनीष खरे व बृजेश सिंह मौजूद रहे।




















