ट्रंप पर भड़का ईरान, कहा सातों दावे किए झूठे’, होर्मुज में सिर्फ चलेगा हमारा कानून

भड़का ईरान

आरयू इंटरनेशनल डेस्क। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने तीखा हमला बोला है। गालिबाफ ने आरोप लगाया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जारी गतिरोध को लेकर ट्रंप ने भ्रामक और गलत दावे किए हैं। साथ ही चेतावनी दी कि यदि ईरान पर लगातार दबाव और प्रतिबंधों की नीति जारी रहती है, तो इसके वैश्विक समुद्री व्यापार और शिपिंग मार्गों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में गालिबाफ ने कहा कि ट्रंप ने एक घंटे में सात दावे किए, और वे सातों ही झूठे थे। गालिबाफ ने आरोप लगाया कि ऐसे बयानों से न तो युद्ध में सफलता मिली है और न ही बातचीत की मेज पर कोई फायदा होगा। वहीं चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध और नाकेबंदी जारी रहती है, तो होर्मुज स्ट्रेट खुला नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से आवाजाही केवल तय किए गए रास्तों और ईरान की अनुमति के आधार पर ही संभव होगी।

दरअसल ट्रंप ने एक पोस्ट मे स्पष्ट किया कि ईरान के साथ समझौता पूरा होने तक होर्मुज स्ट्रेट की नौसैनिक नाकाबंदी बरकरार रहेगी, हालांकि उन्होंने दावा किया कि यह प्रक्रिया बहुत जल्द पूरी हो जाएगी क्योंकि अड़चनों पर पहले ही बातचीत हो चुकी है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका फिर से बम गिराना शुरू कर सकता है। आगे कहा, ‘हो सकता है मैं इसे आगे न बढ़ाऊं, लेकिन ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी जारी रहेगी। दुर्भाग्य से हमें फिर से बम गिराना शुरू करना होगा।’

इस पर ईरानी स्पीकर ने दो टूक कहा, ‘उन्होंने (ट्रंप ने) इन झूठों से युद्ध नहीं जीता और वे बातचीत में भी कहीं नहीं पहुंच पाएंगे। जलडमरूमध्य खुला रहेगा या बंद होगा और इसे नियंत्रित करने वाले नियम जमीनी हकीकत से तय होंगे, सोशल मीडिया से नहीं’ गालिबाफ ने आरोप लगाया कि ट्रंप ने एक घंटे में सात दावे किए, जिनमें से सभी झूठे थे, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि दावे वास्तव में क्या थे।

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इस दौरान ईरानी संसद स्पीकर ने मीडिया युद्ध पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि जनमत को प्रभावित करने की कोशिशें आधुनिक युद्ध का हिस्सा हैं, लेकिन ईरानी जनता इन रणनीतियों से प्रभावित नहीं होगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वार्ता से जुड़ी वास्तविक और सटीक जानकारी के लिए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हालिया इंटरव्यू को ही आधार माना जाए।

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