आरयू वेब टीम। यूपी के लखीमपुर खीरी जिले में विरोध- प्रदर्शन कर रहे किसानों की गाड़ी से कुचलकर की गई हत्या केस में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस केस में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज है। इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गवाहों को पेश नहीं किए जाने को लेकर नाराजगी जताई है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि योगी सरकार ने जो स्थिति रिपोर्ट सौंपी है जिसमें गवाहों को पेश न करने का कोई कारण नहीं बताया गया है। साथ ही चार हफ्तों में मांगी डिटेल रिपोर्ट।
गवाहों को कोर्ट में पेश नहीं किए जाने और स्टेटस रिपोर्ट में इसका कारण नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट ने चार हफ्तों में डिटेल रिपोर्ट मांगी है। पीठ ने कहा कि लगभग दो महीने से इस केस में किसी भी गवाह से पूछताछ नहीं की गई है। पीठ ने कहा कि ‘‘ हम पीठासीन न्यायाधीश को गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कानून सम्मत कदम उठाने का निर्देश देते हैं।” पीठ ने निचली अदालत के न्यायाधीश से मुकदमे को समयबद्ध तरीके से समाप्त करने का प्रयास करने और कोर्ट के सामने स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
सरकारी गवाहों की संख्या अभी भी उतनी ही
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘हमें ये देखकर निराशा हुई कि तथाकथित स्टेटस रिपोर्ट में पिछली तारीखों पर गवाहों को पेश न करने का कोई कारण नहीं बताया गया है।’ इस केस में मार्च में हुई प्रोग्रेस पर जस्टिस बागची ने कहा कि गवाह पेश हुआ, सरकारी वकील ने कहा कि मैं इस गवाह को छोड़ रहा हूं। आपके जांच किए जाने वाले सरकारी गवाहों की संख्या अभी भी उतनी ही है। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने दलील देते हुए कहा कि स्टेटस रिपोर्ट से पता चलता है कि जो टेप हमने सौंपा था। वे सही पाया गया, लेकिन वे कह रहे हैं कि इस व्यक्ति की संलिप्तता की अभी भी जांच की जा रही है। मैं दिखाऊंगा कि गवाहों को क्यों छोड़ा जा रहा है। यह काफी परेशान करने वाली बात है। प्रशांत भूषण ने कहा कि पुलिस तारीख से पहले गवाहों को धमका रही है, इसीलिए वे नहीं आ रहे हैं।
35 गवाहों की होनी है जांच
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दो ट्रायल चल रहे हैं। आज कोर्ट में दाखिल की गई लेटेस्ट स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले ट्रायल में, केवल 44 गवाहों की जांच की गई है और 15 को बरी कर दिया गया है। दूसरा ट्रायल कुल 35 गवाहों की जांच होनी है, 26 ने गवाही दी है। केवल नौ बाकी हैं। हमें ये देखकर निराशा हुई कि तथाकथित स्टेटस रिपोर्ट में पिछली तारीखों पर गवाहों को पेश न करने का कोई कारण नहीं बताया गया है। साथ ही कहा कि ऐसा लगता है कि दो महीनों से किसी भी गवाह की जांच नहीं की गई है।
गवाह सुरक्षा योजना का पालन भी करें सुनिश्चित
हम पीठासीन न्यायाधीश को निर्देश देते हैं कि वे दोनों मामलों में गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कानूनी उपाय करें। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में यह जोड़ा कि पीठासीन न्यायाधीश गवाह सुरक्षा योजना का पालन भी सुनिश्चित करें। दोनों ट्रायलों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का प्रयास करें। तीसरे ट्रायल पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा स्टेटस रिपोर्ट से पता चलता है कि चार्जशीट दाखिल कर दी गई है, लेकिन जहां तक याचिकाकर्ता का सवाल है, उसकी भूमिका की अभी भी जांच की जा रही है। जांच अधिकारी जांच पूरी करें और यह सुनिश्चित करें कि रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर कोर्ट में दाखिल कर दी जाए।
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बता दें कि लखीमपुर खीरी हिंसा मामले से जुड़े दो मामलों की सुनवाई यूपी की एक अदालत में चल रही है। लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में तीन अक्टूबर, 2021 को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के दौरे के विरोध में किसानों द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान चार किसानों सहित आठ लोग मारे गए थे। चार किसानों को एक स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल कुचल दिया था। इसके बाद कथित तौर पर क्रोधित किसानों ने एक चालक और भाजपा के दो कार्यकर्ताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हो गई।

















