आरयू वेब टीम। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान मोदी सरकार को जमकर घेरा। राहुल गांधी ने भारत-यूएस डील से लेकर एपस्टीन फाइल के मुद्दों को लेकर हमला बोला। राहुल ने कहा कि मोदी सरकार ने भारत को अमेरिका के हाथों बेच दिया और सवाल किया कि मोदी सरकार को थोड़ी भी शर्म आई होगी?
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राहुल गांधी ने कहा कि भारत के लोगों के पास सबसे ज्यादा डेटा है। डेटा की सुरक्षा सबसे अहम है। हमारे लोगों के टैलेंट, सोच पर कब्जे की कोशिश हो रही है। यूएस और चीन की नजर हमारे डेटा पर है। बांग्लादेश अगर टेक्सटाइल्स प्रोडक्ट एक्सपोर्ट करता है, तो उस पर जीरो टैरिफ है। हमारी टेक्सटाइल्स इंडस्ट्री गई। अमेरिकी निर्यात बढ़ा, हमें क्या मिला।
एनर्जी सेक्टर का हो रहा है हथियारीकरण
साथ ही कहा कि ट्रंप ने टैरिफ बढ़ा दिया। अब क्या अमेरिका तय करेगा कि हम कहां से तेल खरीदें। ऐसा किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया। एक सुपर पावर का युग खत्म हो गया है। अमेरिका अगर यह कह रहा है कि आप यहां से तेल नहीं खरीद सकते, इसका मतलब है कि एनर्जी सेक्टर का हथियारीकरण हो रहा है। अमेरिका टैरिफ बढ़ाता है, इसका मतलब है कि फाइनेंस सेक्टर का वेपनाइजेशन हो रहा है। सरकार को शर्म आनी चाहिए।
आंखों में साफ दिखता है डर
भारत-यूएस डील को लेकर राहुल गांधी का लोकसभा में आक्रमक रूप देखने को मिला। राहुल गांधी ने कहा कि मोदी जी ने देश को अमेरिका के हाथों बेच दिया, मोदी जी को थोड़ा भी शर्म है कि नहीं, उनके आंखों में साफ डर दिखता है, इसलिए वो हमसे नजरें नहीं मिला पाते। कांग्रेस नेता ने इस दौरान एप्सटीन फाइल का भी जिक्र किया, जिसके बाद लोकसभा में भारी हंगामा हो गया। स्पीकर के विरोध के बाद राहुल ने कहा कि ठीक है हम इसपर बात नहीं करेंगे।
ठोस नीतियों की जरूरत
राहुल गांधी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच दुनिया एक नए और संभावित रूप से खतरनाक दौर में प्रवेश कर रही है। उनके मुताबिक, 140 करोड़ भारतीयों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं, जिनका सामना करने के लिए ठोस नीतियों की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा बजट में इन अहम मुद्दों खासकर डेटा और तकनीक-को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नजर नहीं आता।
भारत का डेटा उसकी बड़ी ताकत
उन्होंने कहा कि आज डॉलर और ऊर्जा दोनों का इस्तेमाल रणनीतिक हथियार की तरह किया जा रहा है। अमेरिका यदि अपनी सुपरपावर की स्थिति और डॉलर का वैश्विक वर्चस्व बनाए रखना चाहता है, तो उसमें भारतीय डेटा की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। राहुल के अनुसार, भारत का डेटा उसकी बड़ी ताकत है और किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में इसे प्राथमिकता मिलनी चाहिए। साथ ही ये भी कहा कि यदि अमेरिका के साथ कोई बातचीत होती, तो सबसे पहले डेटा सुरक्षा और उससे जुड़े राष्ट्रीय हितों पर चर्चा की जाती। उनका मानना है कि भारत को बराबरी के आधार पर बातचीत करनी चाहिए, न कि किसी अधीनस्थ की तरह। इसके बाद ऊर्जा सुरक्षा और फिर कृषि तथा किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को अपने डेटा और किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और खुद को पाकिस्तान के बराबर नहीं मानना चाहिए, क्योंकि भारत की स्थिति और क्षमता अलग है।
‘वो टैप कर ‘सरेंडर’ कर देता’
राहुल गांधी ने कहा कि मार्शल आर्ट की फाउंडेशन ग्रिप से शुरू होती है। लक्ष्य होता है कि ग्रिप मिलने के बाद चोक लेकर गला पकड़ लिया जाए। ऐसा करते समय जब खिलाड़ी के हाथ में चोक आ जाता है, तो ये उसकी आंख में दिख जाता है। उसे समझ आ जाता है कि मैंने इसे पकड़ लिया है। जिसे पकड़ा जाता है, वो दो से तीन बार छूटने की कोशिश करता है, लेकिन फिर उसे भी पता चल जाता है। अब मैं गया। बात वहीं खत्म हो जाती है और जिसे पकड़ा जाता है वो टैप कर ‘सरेंडर’ कर देता है। ग्रिप राजनीति में भी होती है। फर्क ये है कि मार्शल आर्ट में ग्रिप नजर आती है, लेकिन राजनीति में किसने-कहां ग्रिप ले रखी है, कौन कहां चोक ले रहा है- वो नजर नहीं आता। राहुल गांधी ने भारत-यूएस डील को लेकर कहा कि हमने अपनी जनता को अमेरिका के हाथों बेच दिया।
मार्शल आर्ट का मूल तत्व संतुलन और समन्वय
इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मार्शल आर्ट के जिक्र के साथ भाषण की शुरुआत की है। राहुल ने कहा कि मार्शल आर्ट का मूल तत्व संतुलन और समन्वय है। जूडो या कराटे के किसी भी खिलाड़ी से पूछ लीजिए, यह केवल व्यक्तिगत ताकत का नहीं बल्कि समूह की रणनीति और तालमेल का खेल है। जुजुत्सु में भी साफ दिखता है कि किसने किस तरह की पकड़ बनाई है और स्थिति को कैसे नियंत्रित किया जा रहा है। आगे कहा कि आज दुनिया जियोपॉलिटिकल टकराव के दौर से गुजर रही है। अमेरिका के वैश्विक प्रभुत्व को चीन चुनौती दे रहा है और ऊर्जा तथा वित्त जैसे संसाधनों को अब रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। गाजा और यूक्रेन जैसे संघर्ष इसके उदाहरण हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी जिक्र होता है। इन वैश्विक परिस्थितियों का असर भारत की आईटी कंपनियों पर भी दिख रहा है, जो मौजूदा हालात में चुनौतियों का सामना कर रही हैं।




















