आरयू ब्यूरो, लखनऊ। लखनऊ में 69 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों ने एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। मंगलवार को अभ्यर्थियों ने निशातगंज स्थित एससीईआरटी कार्यालय का घेराव कर नारेबाजी की और 6,800 पदों पर नियुक्ति के लिए योगी सरकार से सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी कराने की मांग उठाई।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से नियुक्ति की उम्मीद में संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामले की सुनवाई लगातार लंबित बनी हुई है और वे न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। वहीं प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने कहा कि 6,800 पदों पर नियुक्ति का मामला लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में है और इसकी अगली सुनवाई 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में निर्धारित है। अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार को इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए न्यायालय में प्रभावी पक्ष रखना चाहिए, ताकि लंबित मामले का शीघ्र निस्तारण हो सके।
इस दौरान प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि न्यायालय में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अधिवक्ता समय पर उपस्थित नहीं होते, जिससे सुनवाई प्रभावित होती है। एक अभ्यर्थी ने कहा कि उनकी प्रमुख मांग यह है कि सरकार मामले में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करे। कई बार सुनवाई की तारीखें लग चुकी हैं, लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई। अभ्यर्थियों के अनुसार, न्यायालय अपना निर्णय देगा, लेकिन सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने पक्ष को मजबूती से प्रस्तुत करे।
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वहीं प्रदर्शन में महिला अभ्यर्थियों ने भी अपनी बात रखते हुए बताया कि वह कई वर्षों से इस आंदोलन का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने इस संघर्ष की शुरुआत की थी, तब उनका बेटा बहुत छोटा था और अब वह बड़ा हो चुका है। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच लगातार प्रदर्शन और आंदोलन में शामिल होना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। उनका उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना है ताकि वह अपने परिवार और बच्चों को बेहतर भविष्य दे सकें। उनके अनुसार, लंबे समय से चल रहे इस संघर्ष ने अभ्यर्थियों के जीवन को गहराई से प्रभावित किया है।
इस दौरान अभ्यर्थियों ने कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के बयान पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ओपी राजभर कहते हैं कि हम लोग ‘लात खाने लायक’ हैं। आज हमारे मुद्दे पर उनकी जुबान खामोश है, जबकि सरकार में आने से पहले वह हमारे पक्ष में खुलकर बोलते थे।



















