आरयू ब्यूरो, लखनऊ। 69 हजार शिक्षक भर्ती में नियुक्ति की मांग को लेकर शनिवार को लगातार दूसरे दिन दलित-पिछड़े अभ्यर्थियों ने राजधानी में प्रदर्शन किया। नौकरी की मांग और आरक्षण से जुड़े विवाद के समाधान की मांग को लेकर दलित-पिछड़े अभ्यर्थियों ने इस बार बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती के आवास का रुख किया। मायावती आवास के बाहर पहुंचे अभ्यर्थियों ने घेराव कर मायावती बाहर आओ समेत अन्य नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच नोकझोंक व धक्का-मुक्की हुई। बाद में पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया।
दरअसल प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थी मायावती से मुलाकात कर अपनी बात रखने की मांग कर रहे थे। पुलिस ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। काफी देर तक मौके पर तनावपूर्ण माहौल बना रहा। इसके बाद पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया, जहां पहले से विभिन्न संगठनों के प्रदर्शन के लिए व्यवस्था की जाती रही है।
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अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने की मांग कर रहे हैं। अभ्यर्थियों के अनुसार सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में 8270 पदों से संबंधित हलफनामा दाखिल किया है, जबकि उनका दावा है कि विवाद केवल 6800 पदों का है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में ऐसे अभ्यर्थियों के नाम भी शामिल किए गए हैं, जो पहले ही चयनित हो चुके हैं, जिससे वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों को नुकसान हो रहा है।
रिक्त पदों पर दी जाए पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति
इस दौरान आंदोलन में शामिल अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि सरकार की वर्तमान प्रक्रिया लागू होती है तो केवल लगभग 3300 अभ्यर्थियों को ही नियुक्ति का लाभ मिल सकेगा। उनका दावा है कि आरक्षण से जुड़े कथित घोटाले को विभिन्न स्तरों पर स्वीकार किया जा चुका है, इसलिए रिक्त पदों पर पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जानी चाहिए। साथ ही ये भी मांग उठाई कि जिन अभ्यर्थियों ने काउंसलिंग में हिस्सा नहीं लिया या नियुक्ति ग्रहण नहीं की, उनके पदों को रिक्त मानते हुए मेरिट सूची के अनुसार नए अभ्यर्थियों को अवसर दिया जाए।
आंदोलन जारी रखने का ऐलान
वहीं प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक विवादित पदों पर पारदर्शी तरीके से नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं होती और उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल शिक्षक भर्ती से जुड़ा यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और अभ्यर्थियों की नजर आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है।


















