आरयू ब्यूरो, लखनऊ। समाजवादी पार्टी ने बुधवार को यूपी विधान परिषद में अपने नेतृत्व में बदलाव किया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मोहम्मद जासमीर अंसारी के नाम पर मुहर लगाते हुए उन्हें विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बनाने का फैसला किया है। जासमीर अंसारी इससे पहले सदन में सपा के उपनेता की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। जासमीर अंसारी अब लाल बिहारी यादव की जगह नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे।
मिली जानकारी के मुताबिक मोहम्मद जासमीर अंसारी सीतापुर जिले के लहरपुर के रहने वाले हैं। उनका जन्म 12 जनवरी 1968 को हुआ था। वह लहरपुर विधानसभा सीट से दो बार विधायक रह चुके हैं। 2007 से 2017 तक उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर लहरपुर का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद जासमीर अंसारी कांग्रेस में शामिल हुए। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थामा। जुलाई 2022 में वह विधायकों द्वारा चुने जाने वाले निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य निर्वाचित हुए।
वहीं विधान परिषद में पहुंचने के बाद जासमीर अंसारी सपा के सक्रिय नेताओं में शामिल रहे। जुलाई 2024 में उन्हें विधान परिषद में पार्टी का उपनेता बनाया गया था। इस दौरान वह सदन में सपा की ओर से सरकार की नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे। अंसारी विधान परिषद की विभिन्न जिम्मेदारियों से भी जुड़े रहे हैं। सदन में उनकी सक्रियता के चलते अब पार्टी ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है।
दरअसल लाल बिहारी यादव जुलाई 2024 से उत्तर प्रदेश विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके स्थान पर अब जासमीर अंसारी को यह जिम्मेदारी दी गई है। उपलब्ध ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अखिलेश यादव ने अंसारी की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। यह बदलाव विधान परिषद के लिए घोषित आगामी चुनाव कार्यक्रम के बीच हुआ है। यूपी में विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव होना है। मतदान 23 अक्टूबर को और मतगणना 27 अक्टूबर को प्रस्तावित है।
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जासमीर अंसारी की नियुक्ति को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा की राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी लंबे समय से पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समूहों को अपने राजनीतिक आधार का महत्वपूर्ण हिस्सा बताती रही है। अंसारी की राजनीतिक पृष्ठभूमि और अलग-अलग दलों में काम करने के अनुभव को देखते हुए अब विधान परिषद में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। हालांकि उनकी नियुक्ति के पीछे पार्टी की आधिकारिक रणनीति क्या है, इसका अंतिम आकलन आने वाले समय में उसके फैसलों और सदन में उसकी प्राथमिकताओं से किया जा सकेगा।
नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद जासमीर अंसारी विधान परिषद में सपा की ओर से सरकार को घेरने की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर होगी। सदन में वह कानून-व्यवस्था, विकास, जनहित और सरकार की नीतियों से जुड़े मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखेंगे। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच विधान परिषद में नेतृत्व परिवर्तन को सपा के लिए एक अहम संगठनात्मक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।




















