आरयू वेब टीम। जंतर मंतर समेत देशभर में जारी छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच आखिरकार मोदी सरकार को छात्रों की मांग के आगे झुकना पड़ा है। नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर मंतर पर जश्न का माहौल देखने को मिला। इस्तीफे पर सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा कि झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।
वहीं मोदी सरकार को निशाने पर लेते हुए अभिजीत दीपके ने कहा, ‘धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। क्या कह रहे थे ये, इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते। हम कहते हैं, झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए। प्रधान का इस्तीफा इस बात का सबूत है कि अगर आप डरते नहीं हैं, तो जीत सकते हैं।’ केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद दीपके ने जंतर-मंतर पर जमकर जश्न मनाया। छात्रों की भीड़ ने जमकर नारेबाजी की।
इस दौरान दीपके ने कहा, मैं कुछ बहुत जरूरी बात कहना चाहता हूं। मुझे हीरो मत बनाओ क्योंकि धर्मेंद्र प्रधान ने आज इस्तीफा दे दिया। यह गलती मत करो। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की वजह से मुझे हीरो मत बनाओ। एक आदमी को हीरो बनाने की वजह से देश बर्बाद हो गया है।’ ये जीत उनकी है जिनकी जान धर्मेंद्र प्रधान ने ली।
साथ ही दिपके ने कहा कि ये तो एक ही मांग पूरी हुई है, अभी दो मांगे और है उसे भी पूरा करना पड़ेगा। वो है कि पहले तो पीड़ित परिवारों को एक करोड़ का मुआवजा देना होगा, दूसरा जिन छात्रों पर पुलिस ने कार्रवाई की उन्हें सजा मिले। और सारे केस छात्रों के खिलाफ हुए हैं वो वापस होने चाहिए। आगे कहा कि हम कॉकरोच हैं इतनी आसानी से नहीं जा सकते, एक बार घुस गए तो बाहर निकलना मुश्किल है।
इसके अलावा सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा, ‘अगर आप हमारी तीन मांगें लिखकर मान लें तो हम घर चले जाएंगे। हमने पूरे देश में शांति से कैंडल मार्च निकालने की परमिशन मांगी है। सभी को शाम 6:00 बजे पूरे देश में कैंडल मार्च निकालना चाहिए।
गौरतलब है कि प्रधान ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया है। साथ ही कहा, ‘‘पिछले दस दिन का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुखी है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है।’’ प्रधान ने कहा कि उन्होंने पहले दिन से ही जिम्मेदारी ली है और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा।
उन्होंने लिखा, ‘‘जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में ना उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर ध्यान केंद्रित करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया है।’’


















