आरयू वेब टीम। देश की सबसे पुरानी पर्वतमालाओं में से एक अरावली एक बार फिर सियासी और पर्यावरणीय बहस छिड़ी हुई है। अरावली के मुद्दे को लेकर बुधवार को कांग्रेस ने मोदी सरकार फिर निशाना साधा और सवाल किया कि वह इस पर्वतमाला की परिभाषा में इतनी बड़ी खामियों वाले बदलाव को आगे बढ़ाने पर क्यों अड़ी हुई है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव इस विषय पर लोगों को गुमराह कर रहे हैं।
पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने एक खबर का हवाला देते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘अब यह बिल्कुल साफ हो गया है कि अरावली मुद्दे पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री पूरी तरह से सच नहीं बता रहे हैं और जनता को गुमराह कर रहे हैं।’’
साथ ही कहा कि ‘‘अरावली की परिभाषा में जो बदलाव मोदी सरकार कर रही है, उसका भारतीय वन सर्वेक्षण, उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित केंद्रीय विशेषाधिकार समिति और उच्चतम न्यायालय के न्याय मित्र ने स्पष्ट और जोरदार विरोध किया है।” साथ ही सवाल किया कि फिर भी मोदी सरकार अरावली की परिभाषा में इतनी बड़ी खामियों वाले बदलाव को आगे बढ़ाने पर क्यों अड़ी हुई है?
दरअसल भूपेंद्र यादव ने सोमवार को कांग्रेस पर अरावली की नई परिभाषा के मुद्दे पर ‘गलत सूचना’ और ‘झूठ’ फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि पर्वत श्रृंखला के केवल 0.19 प्रतिशत हिस्से में ही कानूनी रूप से खनन किया जा सकता है। यादव ने प्रेसवार्ता में ये भी कहा था कि नरेंद्र मोदी सरकार अरावली की सुरक्षा और पुनर्स्थापन के लिए ‘पूरी तरह से प्रतिबद्ध’ है।
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बता दें कि अरावली की पहाड़ियों के संबंध में 13 अक्टूबर को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्वतमाला के लिए सौ मीटर की नई परिभाषा तय की थी और इसकी सिफारिश सुप्रीम कोर्ट के पास भी की थी। कोर्ट ने सरकार के इस प्रस्ताव को जल्द ही स्वीकार भी कर लिया था, लेकिन खास बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट की ही समिति ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था।




















