आरयू वेब टीम। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की “अभद्र” टिप्पणी पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने बुधवार को कड़ी प्रतिक्रिया दी है। साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को ये स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की उस “अभद्र” टिप्पणी से सहमत हैं जिससे न सिर्फ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, बल्कि देश के करोड़ो लोगों का अपमान हुआ है।
दरअसल सरमा ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत करते हुए खरगे के लिए आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया था। जिसपर प्रियंका गांधी ने एक्स पर पोस्टकर कहा की, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी के प्रति जिस तरह की अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया है, वह अत्यंत शर्मनाक और अस्वीकार्य है।
उन्होंने कहा कि खरगे देश के वरिष्ठतम नेताओं में से एक हैं। वह न सिर्फ कांग्रेस पार्टी के, बल्कि देश के दलितों व वंचितों के प्रबुद्ध प्रतिनिधि हैं। उनका अपमान करके भाजपा के मुख्यमंत्री ने देश के करोड़ों लोगों का अपमान किया है। प्रियंका ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी देश के सामने स्पष्ट करें, क्या वे करोड़ों भारतीयों के इस अपमान से सहमत हैं?
इससे पहले कांग्रेस ने मंगलवार को हिमंत सरमा पर पार्टी अध्यक्ष खरगे का अपमान करने का आरोप लगाया और उनके कथित “निंदनीय आचरण” के लिए बिना शर्त माफी मांगने की मांग की और भाजपा की दलित विरोधी मानसिकता का प्रतिबिंब बताया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि सरमा द्वारा पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ “अपमानजनक भाषा” का प्रयोग पूरे अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदाय का अपमान है, और इस मामले पर प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी उनकी बेबसी नहीं, बल्कि उनकी सहमति है।
राहुल गांधी ने एक पोस्ट में कहा, अगर प्रधानमंत्री देश में करोड़ों दलितों की गरिमा पर हमले को देखते हैं और चुप रहते हैं, तो वे न केवल अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं, बल्कि उस अपमान में भागीदार भी हैं। राहुल ने कहा कि सरमा द्वारा खरगे के खिलाफ अश्लील और अपमानजनक भाषा का प्रयोग पूरी तरह से निंदनीय, शर्मनाक और अस्वीकार्य है।
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राहुल ने कहा, “खरगे जी देश के वरिष्ठ और लोकप्रिय दलित नेता हैं – उनका अनुभव, कद और प्रतिष्ठा अतुलनीय है। उनका अपमान करना केवल एक व्यक्ति का ही नहीं, बल्कि देश के करोड़ों अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों का अपमान है। उन्होंने कहा कि यह भाजपा-आरएसएस की पुरानी और सोची-समझी मानसिकता को दर्शाता है और इसमें कुछ भी नया नहीं है।
आगे कहा कि चाहे बाबासाहब अंबेडकर का अपमान हो, दलित नेताओं को नीचा दिखाना हो, या अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति समुदाय के प्रतिनिधियों पर व्यक्तिगत हमले हों, भाजपा और आरएसएस का इतिहास गवाह है कि जब भी कोई दलित नेता सच बोलता है, वे उसे अपमानित करने पर तुले रहते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “यही उनकी विचारधारा है, यही उनका असली चरित्र और चेहरा है।” प्रधानमंत्री से सीधा सवाल करते हुए उन्होंने पूछा, क्या आप हिमंता सरमा द्वारा इस तरह की भाषा के प्रयोग का समर्थन करते हैं? आपकी चुप्पी बेबसी नहीं, बल्कि सहमति है।




















