आंध्र प्रदेश में चुनाव धांधली के आरोपों पर SC का आदेश, ‘उम्मीदवारों की लिस्ट न करें पब्लिश’

सुप्रीम कोर्ट

आरयू वेब टीम। आंध्र प्रदेश में शहरी निकाय चुनाव में धांधली के आरोपों पर देश की सबसे बड़ी अदालत में बुधवार को सुनवाई हुई। नामांकन की तारीख आगे बढ़ाने की जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाइएसआर कांग्रेस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि प्रत्याशियों की अंतिम सूची का 25 अक्टूबर तक प्रकाशन न करें।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ”जिन पार्टियों और प्रत्याशियों ने नामांकन के दौरान सुरक्षा को लेकर ज्ञापन सौंपा है, उस पर कल शाम तक निर्णय लें। निर्णय प्रकाशित होने के बाद उन प्रत्याशियों को नामांकन के लिए 48 घंटे का समय दें। राज्य के डीजीपी यह सुनिश्चित करें कि सभी नामांकन केंद्रों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था हो।”

यह भी पढ़ें- पांच राज्यों की छह सीटों पर उपचुनाव की घोषणा, चुनाव आयोग ने जारी किया शेड्यूल

वाइएसआर कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर शिकायत की थी कि विपक्ष के प्रत्याशियों को हिंसा के जरिए नामांकन भरने से रोका गया है। अगर अभी चुनाव आयोग को उम्मीदवारों की अंतिम लिस्ट प्रकाशित करने दिया गया, तो 63 प्रतिशत प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए जाएंगे।

पीड़ितों के लिए न्याय की मांग

इससे पहले वाइएसआरसीपी के राज्य महासचिव एल. अप्पी रेड्डी ने राज्य चुनाव आयुक्त से अपील की कि वे स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान वाइएसआरसीपी उम्मीदवारों को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा में तुरंत हस्तक्षेप करें। उन्होंने पीड़ितों के लिए न्याय की मांग की और इसके लिए जिम्मेदार टीडीपी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। रेड्डी ने आरोप लगाया कि कुप्पम में वाइएसआरसीपी के चेयरपर्सन पद के उम्मीदवार विजय कुमार का उनके डीके पल्ली स्थित आवास से अपहरण कर लिया गया है।

सीएम ने आरोपों को किया खारिज

वहीं टीडीपी प्रमुक और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया कि जहां गठबंधन सरकार विकास के लिए काम कर रही है, वहीं वाइएसआरसीपी विनाशकारी एजेंडे पर चल रही है। वाइएसआरसीपी ने अतीत में भी और मौजूदा चुनावों में भी हिंसा का सहारा लिया है। उन्होंने कहा, “मेरे जीवन में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है, लेकिन मैं अपराधियों और गुंडों से भागूंगा नहीं।

यह भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार के निलंबन की याचिका खारिज कर कहा ‘संवैधानिक संस्थाएं निभाएंगी जिम्मेदारी’