बोले सीएम योगी, ‘सिर्फ अधिकारों का ग्रंथ नहीं, कर्तव्यों का दायित्व भी है भारत का संविधान’

संविधान दिवस
कार्यक्रम को संबोधित करते सीएम योगी।

आरयू ब्यूरो, लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को प्रदेशवासियों को संविधान दिवस की शुभकामनाएं दी हैं। संविधान दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत का संविधान केवल अधिकारों का ग्रंथ नहीं, बल्कि कर्तव्यों का पवित्र दायित्व भी है। सीएम ने कहा ‘जब कोई नागरिक अपने कर्तव्य भूलकर केवल अधिकारों की बात करता है, तब लोकतंत्र कमजोर होता है। कर्तव्यों के बगैर अधिकार सुरक्षित ही नहीं रह सकते हैं।’ साथ ही कहा है कि भारत के संविधान की मूल भावना न्याय, समता और बंधुता हैं।

सीएम योगी ने कहा  ‘भारत रत्न’ बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की अद्भुत दृष्टि, प्रखर विचार और अथक परिश्रम से निर्मित हमारा संविधान विश्व के सबसे सशक्त लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है। लोक भवन सभागार में आयोजित संविधान की उद्देशिका का शपथ पाठ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने संविधान निर्माण की ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि ””डा. भीमराव आंबेडकर और संविधान निर्माताओं ने दो वर्ष 11 महीने 18 दिन की कठिन मेहनत से दुनिया का सबसे समावेशी संविधान दिया। इस दौरान योगी ने कार्यक्रम में भारत के संविधान की उद्देशिका को पढ़ा और सभी ने उनके साथ उसे दोहराया।

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योगी ने कहा आज भारत के संविधान को अंगीकृत किये जाने के अमृत महोत्सव का समारोप (समापन) है 2015 से प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से पूरा देश 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में आयोजित करता है मैं सबसे पहले संविधान के शिल्पी बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की स्मृतियों को नमन करता हूं और आप सभी को इस अमृत महोत्सव एक अवसर पर शुभकामनायें देता हूं, संविधान के निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने पर आप सबको बधाई देता हूं।

हम स्वतंत्रता की वास्तविक कीमत भूल जाते

आगे सीएम योगी ने कहा अक्सर होता है कि हम में से हर व्यक्ति स्वतंत्र भारत का नागरिक होने के बाद स्वतंत्रता की वास्तविक कीमत को भूलते जा रहे हैं क्योंकि हमने स्वाधीनता की लड़ाई को देखा नहीं हैं हमने उन क्रूर यातनाओं को नहीं सहा इसका परिणाम ये है कि आज हर व्यक्ति अपने अधिकार की बात करता है लेकिन ये अधिकार तब संरक्षित होते हैं, अधिकार तब सुरक्षित होते हैं और अधिकार संपन्न व्यक्ति तब होता है जब वो व्यक्ति स्वयं अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की आदत डाले।

…भारत इस मामले में सौभाग्यशाली

इस दौरान कहा कि कर्तव्य के बिना अधिकार नहीं हो सकता और जिन लोगों ने भी कर्तव्य के बिना अधिकार प्राप्त करने का प्रयास किया है वहां पर लोकतंत्र नहीं तानाशाह उस पूरी व्यवस्था को अपनी गिरफ्त में लेकर आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों को रौंदता दिखाई देता है लेकिन भारत इस मामले में सौभाग्यशाली है कि भारत ने अपने संविधान को हमेशा लागू होने के बाद से सर्वोपरि मानकर सदैव इसे सम्मान दिया है। अपने स्वाधीनता संग्राम सेनानियों को अपने प्रतीकों को सम्मान दिया है साथ ही संविधान की मूल भावना को अपने जीवन का हिस्सा का प्रयास किया।

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