आरयू वेब टीम। पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव से पहले ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा सरकार और चुनाव आयोग की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इस बीच शुक्रवार को ममता बनर्जी ने राज्य के हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए पांच नए सांस्कृतिक एवं विकास बोर्डों की घोषणा की। सीएम ने कहा कि ये बोर्ड उनकी अनूठी भाषाओं और परंपराओं की रक्षा करते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार सुनिश्चित करेंगे। साथ ही कहा कि इन बोर्डों का उद्देश्य पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करना और समुदायों का सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित करना है।
इस दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि, मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि हमारी सरकार जल्द ही मुंडा (अनुसूचित जनजाति), कोरा (अनुसूचित जनजाति), डोम (अनुसूचित जनजाति), कुंभकार (अन्य पिछड़ा वर्ग) और सदगोपे (अन्य पिछड़ा वर्ग) समुदायों के लिए पांच नए सांस्कृतिक एवं विकास बोर्डों का गठन करने जा रही है। ये समुदाय बंगाल की जीवंत संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। मैं उन सभी को हार्दिक बधाई देती हूं। उन्होंने आगे कहा कि इन बोर्डों का उद्देश्य पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करना और समुदायों का सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित करना है।
“ये बोर्ड उनकी अनूठी भाषाओं और परंपराओं की रक्षा करते हुए बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार सुनिश्चित करेंगे। वे पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करेंगे और आगे सामाजिक-आर्थिक विकास लाएंगे। 2013 से हमने अपने कमजोर समुदायों के लिए ऐसे कई बोर्ड स्थापित किए हैं, जो उनके सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करते हैं। एक्स पर पोस्ट में सीएम ममता ने कहा कि मां, माटी, मानुष के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का अर्थ है कि हम यह सुनिश्चित करने के लिए समर्पित हैं कि कोई भी समुदाय पीछे न छूटे। हमारा लक्ष्य सरल है। समावेशी प्रगति और अटूट समर्थन के माध्यम से हर चेहरे पर मुस्कान लाना। जय बांग्ला।
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ममता बनर्जी का ये कदम 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले और राष्ट्रपति मुर्मू की हाल ही में पश्चिम बंगाल यात्रा को लेकर हुए राजनीतिक विवाद के बाद उठाया गया है। दरअसल सात मार्च को आयोजित एक संथाल सम्मेलन के दौरान, राष्ट्रपति ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर निराशा व्यक्त की और आयोजन स्थल के चयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि संथाल समुदाय के कई सदस्य कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके क्योंकि यह एक दूरस्थ क्षेत्र में स्थित था। साथ ही कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य राज्य मंत्रियों की अनुपस्थिति पर भी सवाल किया था।




















