आरयू वेब टीम। ई20 पेट्रोल से वाहन खराब होने की शिकायत देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आ रहीं हैं, जबकि लोग सोशल मीडिया पर इससे संबंधित पोस्टकर रहे हैं। इस बीच पेट्रोल से वाहन में खराबी को लेकर छत्तीसगढ़ की रायपुर जिला उपभोक्ता अदालत (अतिरिक्त पीठ) ने एक मशहूर कार कंपनी और उसके स्थानीय डीलर के खिलाफ बेहद सख्त फैसला सुनाया है। ई-20 पेट्रोल और इंजन की खराबी को लेकर आया ये आदेश अपनी तरह का देश का पहला मामला है। कोर्ट ने ग्राहक के साथ हुए धोखे और खराब सर्विस को लेकर कंपनी और डीलर दोनों को जिम्मेदार माना है।
उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीस की बेंच ने आदेश दिया है कि पीड़ित डॉक्टर ग्राहक को उसी मॉडल की नई ई-20 पेट्रोल सपोर्ट करने वाली कार दी जाए। दरअसल उपभोक्ता प्रेमराज देवता ने आरोप लगाया था कि उनकी मारुति ग्रैंड विटारा कार में ई20 पेट्रोल के उपयोग के बाद बार-बार समस्याएं आने लगीं। शिकायत में इंजन संबंधी परेशानी, परफॉर्मेंस के खराब होने, मिसफायरिंग और लगातार माइलेज घटने जैसी समस्याओं का जिक्र किया गया। उपभोक्ता का कहना था कि ई20 पेट्रोल के उपयोग के बाद वाहन की समस्या दूर नहीं हुई, जबकि कई बार सर्विस सेंटर में जांच और मरम्मत कराई गई।
आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के तहत परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार किया। आयोग ने माना कि ई20 पेट्रोल के संबंध में उपभोक्ता के पास व्यवहारिक रूप से अन्य ईंधन विकल्प उपलब्ध नहीं था, क्योंकि अधिकांश पेट्रोल पंपों पर यही ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा था। जिसके बाद आयोग ने संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिया कि वे उपभोक्ता की कार वापस लेकर उसी मॉडल की नई ई20 ईंधन समर्थित कार आदेश की तारीख से 45 दिनों के भीतर उपलब्ध कराएं।
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अगर निर्धारित अवधि में वाहन नहीं बदला जाता है, तो विपक्षी पक्षकारों को वाहन की कीमत और संबंधित खर्चों का भुगतान (कुल राशि 20,50,494) करना होगा। आयोग ने यह भी आदेश दिया कि संबंधित पक्षकारों को मानसिक क्षति और वाद व्यय की राशि भी अदा करनी होगी।
साथ ही आयोग ने उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए एक लाख रुपए और मुकदमे के खर्च के लिए दस हजार रुपए का भुगतान करने को कहा है। आदेश में कहा गया कि राशि का भुगतान 45 दिनों के भीतर नहीं किया जाता है, तो भुगतान की तारीख तक षात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।












