FSSAI ने शिशु पोषण उत्पादों को लेकर नेस्ले इंडिया के खिलाफ की कानूनी कार्रवाई

एफएसएसएआइ

आरयू वेब टीम। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने नेस्ले  इंडिया लिमिटेड के खिलाफ कानूनी एक्शन लिया है। मामला बेबी न्यूट्रिशन फूड प्रोडक्ट्स के गलत विज्ञापन से जुड़ा है। इसे लेकर नेस्ले इंडिया लिमिटेड-यूनिट I और यूनिट II के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। कंपनी पर बेबी न्यूट्रिशन फूड का गलत विज्ञापन करने का आरोप है।

कंपनी विज्ञापन में जिस न्यूट्रिशन का दावा कर रही थी वह प्रोडक्ट के भीतर मिला ही नहीं। एफएसएसएआइ ने शुक्रवार को बताया कि उसने ई-कॉमर्स मंचों पर उपलब्ध नैन एक्सेला प्रो स्टेज1, लैक्टोजेन प्रो1 और एक फॉलो-अप फॉर्मूला तथा इनकी प्रचार सामग्री की जांच की। नियामक ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1 में ‘5एचएमओ’ और ‘व्हे प्रोटीन’ से जुड़े दावों पर आपत्ति जताई गई।

वहीं लैक्टोजेन प्रो 1 में ‘व्हे प्रोटीन’ को आसानी से पचने वाला बताने वाले दावे पर सवाल उठाया गया।एफएसएसएआइ ने कहा कि उसने इन दावों को लेकर नेस्ले इंडिया से स्पष्टीकरण मांगा था। दोनों उत्पाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) विनियम, 2020 के विनियम 4(2) का उल्लंघन करते पाए गए। यह प्रावधान शिशु खाद्य पदार्थों की बिक्री बढ़ाने के उद्देश्य से किए जाने वाले प्रचार संबंधी दावों या सामग्री पर रोक लगाता है।

इसके अलावा, ये उत्पाद शिशु दूध विकल्प, ‘फीडिंग’ बोतल और शिशु खाद्य (उत्पादन, आपूर्ति और वितरण का विनियमन) अधिनियम, 1992 की धारा 3 के भी खिलाफ पाए गए, जो ऐसे उत्पादों के विज्ञापन या प्रचार पर रोक लगाती है। वहीं नेस्ले इंडिया द्वारा निर्मित एक फॉलो-अप फॉर्मूला का नमूना प्रयोगशाला जांच में बायोटिन की मात्रा के मामले में मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया।

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नमूने को दोबारा जांच के लिए भेजा गया और संदर्भ प्रयोगशाला ने भी इसे 2020 के नियमों में निर्धारित बायोटिन की आवश्यकता के अनुरूप नहीं पाया।
एफएसएसएआइ ने कहा कि इन निष्कर्षों के मद्देनजर उसने तीनों उत्पादों के संबंध में नेस्ले इंडिया के खिलाफ तीन अलग-अलग निर्णयन मामले दर्ज किए हैं। इस बीच बीएसई पर नेस्ले इंडिया के शेयर में गिरावट दर्ज की गई।

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