आरयू ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासत तेज हो गई है। कांशीराम जयंती को ने इस साल ‘पीडीए दिवस’ के रूप में मनाने का सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने ऐलान किया है। इसपर बसपा सुप्रीमो मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘विशुद्ध राजनीतिक नाटकबाजी’ करार दिया है। मायावती ने आज अखिलेश पर निशाना साधते हुए कहा है कि सपा का इस प्रकार का व्यवहार शुद्ध रूप से इन उपेक्षित वर्गों के वोटों का स्वार्थ हेतु केवल छलावा व दिखावा है।
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बसपा मुखिया ने अपने बयान में कहा कि जैसा कि सर्व विदित है कि समाजवादी पार्टी का चाल, चरित्र और चेहरा हमेशा से ही दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं बसपा विरोधी तथा ’बहुजन समाज’ में जन्में महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के आदर-सम्मान का नहीं बल्कि जग-जाहिर तौर पर इनके अनादर, अपमान व तिरस्कार का ही रहा है, इस बारे में मीडिया सहित इनका पीडीए भी अच्छी तरह से जानता है। साथ ही, बसपा के जन्मदाता एवं संस्थापक कांशीराम जी की जयंती पर सपा पीडीए दिवस मनायेगी’, जो कि यह सपा की समय-समय पर की जाने वाली विशुद्ध राजनीतिक नाटकबाजी के सिवाय कुछ भी नहीं है।
उपेक्षित वर्गों के वोटों का स्वार्थ…
साथ ही कहा कि सपा का इस प्रकार का व्यवहार शुद्ध रूप से इन उपेक्षित वर्गों के वोटों का स्वार्थ के लिए केवल छलावा व दिखावा है। जैसा कि अन्य विरोधी पार्टियां भी इन वर्गों के वोटों के स्वार्थ की खातिर अक्सर कई मौकों पर ऐसे ही दिखावा व छलावा आदि करती हुईं नजर आती हैं। वास्तव में दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग व बसपा विरोधी रवैये के साथ बहुजन समाज में जन्में महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के अनादर, अपमान व तिरस्कारी रवैये तथा इन वर्गों के शोषण, अत्याचार व जुल्म-ज्यादती आदि का लम्बा इतिहास है, जिसे कभी भी भुलाया जाना मुश्किल ही नहीं बल्कि असंभव लगता है।
गेस्ट हाउस कांड कराकर कराया गया जानलेवा हमला
मायावती ने कहा कि सपा के इस जातिवादी इतिहास की शुरूआत खासकर सन 1993 में सपा व बसपा की गठबंधन से होती है जब गठबंधन सरकार तथा दलित एवं अन्य कमजोर वर्गों के लोगों पर अन्याय-अत्याचार रोकने की पहली शर्त के बावजूद तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव ने अपना रवैया नहीं बदला और जिसके फलस्वरूप अन्ततः बसपा को दिनांक एक जून सन 1995 को सपा सरकार से अपना समर्थन वापस लेना पड़ा था और फिर उसके बाद दिनांक दो जून सन् 1995 को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड कराकर मेरे ऊपर जो जानलेवा हमला कराया गया वह सब काली क्रूरता सरकारी रिकार्ड के साथ-साथ इतिहास के पन्नों में भी दर्ज है।
बसपा के साथ विश्वासघात नहीं तो…
इसी प्रकार, बहुजन समाज में जन्में महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के अनादर, अपमान व तिरस्कारी रवैये की भी काफी लम्बी श्रंखला है, जिसमें सपा को सत्ता में बैठाने वाले ख़ासकर मान्यवर कांशीराम जी के आदर-सम्मान से जुड़े मामले में उनके नाम पर नया जिला बनाने को सपा सरकार द्वारा बदल दिया गया था और जब बसपा की सरकार ने कासगंज को जिला मुख्यालय का दर्जा व सम्मान देते हुये कांशीराम नगर नाम से नया जिला बनाया, तो यह वर्तमान सपा मुखिया अखिलेश के भी गले के नीचे से नहीं उतरा जिसे फिर सपा ने अपनी सरकार बनते ही अपनी जातिवादी व द्वेषपूर्ण नीति एवं दलित विरोधी रवैया अपनाते हुये अन्य जिलों व संस्थानों आदि के नामों की तरह इसका नाम भी बदल दिया, जो कि बसपा के साथ विश्वासघात नहीं तो और क्या है?
सपा का रवैया मुस्लिम विरोधी भी रहा
सपा पर हमला जारी रखते हुए मायावती ने कहा कि सहारनपुर में भी मान्यवर कांशीराम जी के नाम पर बनाये गये सरकारी अस्पताल का नाम भी सपा सरकार ने बदल दिया। क्या यही सब है सपा का कांशीराम जी के प्रति आदर व सम्मान? इसके अलावा, अपने इस दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग व बहुजन समाज विरोधी कृत्यों के साथ-साथ सपा का रवैया मुस्लिम विरोधी भी रहा है। कांग्रेस पार्टी की तरह ही सपा की सरकारों में भी काफी घातक साम्प्रदायिक दंगों में भारी जान-माल की हानि के साथ-साथ लाखों परिवार प्रभावित हुए हैं।




















