राहुल का गंभीर आरोप, नरेंद्र मोदी ने अमेरिका से ट्रेड डील में बेचा पूरा देश, ये कर देगा भारतीय किसानों को बर्बाद

राहुल गांधी
किसान रैली को संबोधित करते राहुल गांधी।

आरयू वेब टीम। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को पंजाब के बरनाला में ‘‘मजदूर किसान महारैली’’ को संबोधित कर दावा किया कि भारत- अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता भारतीय किसानों को बर्बाद कर देगा। राहुल ने नरेंद्र मोदी पर अमेरिका से ट्रेड डील में पूरे देश को बेचने का आरोप लगाया है।

साथ ही कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि कृषि क्षेत्र को खोलने को लेकर असहमति के कारण ये समझौता चार महीने से रुका हुआ था। आगे कहा, ‘‘सवाल उठता है कि जो काम प्रधानमंत्री ने चार महीने तक नहीं किया, वह उन्होंने 15 मिनट में कैसे कर दिया? उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गारंटी दी थी कि भारत हर साल नौ लाख करोड़ रुपये के अमेरिकी उत्पाद खरीदेगा। ये समझौता ‘‘भारतीय किसानों को बर्बाद कर देगा’’।

नौ लाख करोड़ रुपए का सामान खरीदेंगे अमेरिका से 

राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिका से ट्रेड डील में नरेंद्र मोदी ने देश का भयंकर नुकसान किया है। देश का डेटा दे दिया। किसानों को खत्म कर दिया। एमएसएमई को खत्म कर दिया। ऊर्जा सुरक्षा से समझौता कर दिया, लेकिन अमेरिका ने हमें क्या दिया? भारत की ओर से कहा गया कि नौ लाख करोड़ रुपए का सामान हम अमेरिका से खरीदेंगे, लेकिन बदले में अमेरिका ने नहीं कहा कि हम भी खरीदेंगे। इस ट्रेड डील में न अमेरिका के किसानों का नुकसान होगा और न ही इंडस्ट्री का। नरेंद्र मोदी ने पूरा हिन्दुस्तान बेच दिया।

मैं आपको लिखकर दे सकता हूं कि नरेंद्र मोदी…

वहीं राहुल गांधी ने आरोप लगाते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी ने अमेरिका से कहा है कि आप जिससे तेल खरीदने को कहेंगे, उससे ही हम तेल खरीदेंगे। हिंदुस्तान का कोई भी प्रधानमंत्री ऐसा काम नहीं करता। मैं आपको लिखकर दे सकता हूं कि नरेंद्र मोदी भी यह काम नहीं करते, इसलिए मेरा सवाल है आखिर उस दिन ऐसा क्या हुआ कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश का सारा डेटा अमेरिका को सौंप दिया। हमारे देश और किसानों का डेथ वारंट साइन कर दिया।

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इस दौरान रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने
दावा किया कि हाल ही में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद उन्हें लोकसभा में बोलने की अनुमति नहीं दी गई क्योंकि वह पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे के संस्मरणों पर टिप्पणी करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि उनका इरादा जनरल नरवणे की एक अप्रकाशित पुस्तक का उल्लेख करने का था, जिसमें, उनके (नरवणे) दावे के अनुसार, सीमा के निकट चीनी सैनिकों की गतिविधियों के दौरान राजनीतिक नेतृत्व की प्रतिक्रिया की कमी का वर्णन किया गया है।

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