वाराणसी में ‘स्कूल चलो अभियान’ का शुभारंभ कर CM योगी ने कहा, नौ साल में लगभग 60 लाख नए बच्चों को बेसिक शिक्षा से जोड़ा

सीएम योगी
बच्चों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन करते सीएम योगी।

आरयू ब्यूरो, लखनऊ/वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को वाराणसी में कंपोजिट विद्यालय शिवपुर वरुणापार जोन में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के तहत ‘स्कूल चलो अभियान’ का शुभारंभ किया। इस मौके पर सीएम ने विद्यालय परिसर में बच्चों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया, फिर बच्चों से संवाद भी किया। योगी ने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामना दी और स्कूल चलो अभियान की सार्थकता पर जोर दिया। साथ ही बताया कि नौ साल में लगभग 60 लाख नए बच्चों को बेसिक शिक्षा के स्कूलों से जोड़ा गया है। इस मौके पर उन्होंने शिक्षा मित्र अनुदेशक,रसोइयों के लिए भी बड़ी घोषणा की।

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योगी ने बताया कि इस महीने से सरकार अनुदेशकों को 17 हजार, शिक्षामित्रों को 18 हजार रुपये का मानदेय लागू करने जा रही है। शिक्षक, अनुदेशक, रसोइयों के लिए पांच लाख रुपये की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। आगे कहा कि, आप काम करिए, सरकार आपके साथ है। सीएम ने शिक्षकों से अनुरोध किया कि एक से 15 अप्रैल तक हर शिक्षक को स्कूल चलो अभियान से जुड़ना चाहिए। सीएम योगी की घोषणा से शिक्षामित्र, अनुदेशकों में भी खुशी की लहर है। शिक्षक पंकज त्रिपाठी कहते हैं कि मुख्यमंत्री की यह घोषणा शिक्षकों के लिए खुशी की बात है, हम सभी उन्हें धन्यवाद देते हैं।

गांव-मोहल्ले के घरों पर दें दस्तक

सीएम ने कहा कि, प्रधानाचार्य अभिभावकों के साथ संवाद करें और शिक्षक स्कूल खुलने से थोड़ा पहले निकलकर गांव-मोहल्ले के घरों पर दस्तक दें। अभिभावकों से पूछें कि स्कूल जाने से कोई बच्चा वंचित तो नहीं है। उन्हें बताएं कि सरकार सब नि:शुल्क दे रही है, आप बच्चों का पंजीकरण कराइए। हर शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक का संकल्प हो कि स्कूल जाने से कोई बच्चा छूटने न पाए। पहले चरण में 15 अप्रैल तक यह मेहनत कीजिए। जैसे ही बेसिक शिक्षा विभाग के सभी डेटा (बच्चों की संख्या, कितने बच्चों ने कहां प्रवेश लिया आदि) अपलोड हो जाएंगे, उसके तीन-चार दिन के अंदर लखनऊ में समारोह कर डीबीटी के माध्यम से पैसा अभिभावकों के खाते में भेज दिया जाएगा। 15 से 30 अप्रैल के बीच बच्चों की यूनिफॉर्म, जूते-मोजे आदि के लिए अभिभावकों के साथ बैठक करनी चाहिए। यह प्रक्रिया सतत रूप से चलनी चाहिए।

पहले की सरकार के एजेंडे में नहीं थी शिक्षा

वहीं पूर्व की सरकार को निशाने पर लेते हुए सीएम ने कहा कि 2017 के पहले सरकार के एजेंडे में शिक्षा नहीं थी। उन्हें बच्चों की चिंता भी नहीं थी, क्योंकि उनके लोग ही नकल कराते थे। 2017 के पहले ड्रॉप आउट रेट 19 प्रतिशत था। तीसरी से छठी क्लास के बाद बच्चे स्कूल छोड़ देते थे। बच्चे दिनभर घूमते, स्कूल छोड़कर भैंस चराते, तालाब, मोहल्ले, कीचड़, धूल में खेलते दिखते थे। हमने इसका कारण पूछा तो लोग कहते थे कि स्कूल दूर है। हमने प्रदेश भर का डेटा एकत्र कराया तो निष्कर्ष में पता चला कि बच्चे स्कूल इसलिए नहीं जाते थे क्योंकि वहां शौचालय, पेयजल की व्यवस्था नहीं थी। इससे बच्चे अस्वस्थ होते थे।

ड्रॉप आउट रेट शून्य तक पहुंचाने के लिए करना है कार्य

सीएम ने पीएम मोदी की प्रेरणा से यूपी में आए परिवर्तन का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बेसिक शिक्षा के सभी विद्यालयों में बालक-बालिकाओं के लिए अलग शौचालय, पेयजल की व्यवस्था की गई। ड्रॉप आउट रेट 19 से घटकर मात्र तीन प्रतिशत हो गया है। सीएम ने बेसिक शिक्षा परिषद से जुड़े अधिकारियों व शिक्षकों से आह्वान किया कि ड्रॉप आउट रेट शून्य तक पहुंचाने के लिए कार्य करना है। यूपी में अब स्कूली शिक्षा पर 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होते हैं। इस पैसे का परिणाम आना चाहिए। शिक्षक व अधिकारियों ने मेहनत की है, इसलिए सरकार भी आपके साथ खड़ी है। जहां कस्तूरबा गांधी विद्यालय नहीं थे, इस बजट में वहां के लिए भी पैसा दे दिया गया। वहां आठवीं तक की शिक्षा थी, हमने इसे 12वीं तक प्रारंभ कर दिया।श्रमिकों के तथा निराश्रित बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय प्रारंभ किए।

ईश्वर ने शिक्षकों को दी भविष्य गढ़ने की जिम्मेदारी

सीएम ने शिक्षकों से कहा कि देश के भविष्य को गढ़ने की जो जिम्मेदारी ईश्वर ने आपको दी है, उसका ईमानदारी से निर्वहन करेंगे तो जीवन यशस्वी होगा। बच्चे आगे बढ़ेंगे तो स्मरण करेंगे, सम्मान देंगे। जिन शिक्षकों ने हमें पढ़ाया, अक्षर ज्ञान कराया। हम आज भी उनके पैर छूते और सम्मान देते हैं.बच्चों में संस्कार विकसित करने हैं। शिक्षा सिर्फ सर्टिफिकेट या डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं, यह मनुष्य को संस्कारित करने और समाज-राष्ट्र का भविष्य गढ़ने का सशक्त माध्यम है।

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