यूपी में आयुष्मान अस्पतालों को 30 दिन में भुगतान, इलाज में लापरवाही नहीं बर्दाश्त

आयुष्मान

आरयू ब्यूरो, लखनऊ। यूपी सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के तहत पंजीकृत अस्पतालों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब सभी वैध दावों का भुगतान 30 दिनों के अंदर अनिवार्य होगा। साथ ही मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के इस निर्देश से हजारों अस्पतालों को राहत मिलेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देशों के तहत क्लेम निस्तारण प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाने के लिए मेडिकल ऑडिट व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है। साचीज की अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (एसीईओ) पूजा यादव ने बताया कि मेडिकल ऑडिट प्रक्रिया को तेज करने के लिए मेडिकल ऑडिटरों की संख्या 40 से बढ़ाकर 130 कर दी गई है। इससे क्लेम की जांच में तेजी आई है और अनावश्यक देरी पर रोक लगी है। साथ ही क्लेम प्रोसेसिंग डेस्क (सीपीडी) की संख्या भी सौ से बढ़ाकर 125 कर दी गई है, जिससे भुगतान प्रक्रिया और अधिक सुव्यवस्थित हुई है।

इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि योजना के लाभार्थियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन भुगतान में देरी से अस्पताल परेशान हैं। लखनऊ में हुई समीक्षा बैठक में साफ कहा गया कि गुणवत्ता पर आंच आई तो भुगतान रोका जाएगा। आयुष्मान कार्ड धारकों को प्रति परिवार पांच लाख तक का मुफ्त इलाज मिलता है।

राज्य में 1.5 करोड़ से अधिक लाभार्थी हैं। हाल के ऑडिट में दावा सत्यापन में बाधाएं सामने आईं। अब रीयल-टाइम ट्रैकिंग पोर्टल शुरू किया गया है। अस्पतालों को डिस्चार्ज के 24 घंटे में रिकॉर्ड अपलोड करने होंगे। उल्लंघन पर डी-एम्पैनलमेंट की कार्रवाई होगी।

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चिकित्सक संगठनों ने स्वागत किया। डॉ. संजय अग्रवाल ने इसे व्यवस्था में सुधार बताया। हालांकि कागजी कार्रवाई कम करने की मांग की। योगी सरकार का यह कदम चुनावी साल में कल्याण योजनाओं को मजबूत करेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में कवरेज बढ़ाने के लिए 50 फीसदी अधिक अस्पताल जोड़े जाएंगे। गोरखपुर की राम देवी जैसी मरीजों को अब बेहतर सुविधा मिलेगी। योजना की सफलता से प्रदेश स्वास्थ्य सेवाएं नई ऊंचाइयों को छुएंगी।

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