मऊ विधायक अब्बास अंसारी को मिली सुप्रीम कोर्ट से जमानत, …लेकिन इन शर्तों का करना होगा पालन

अब्बास अंसारी
फाइल फोटो।

आरयू वेब टीम। उत्तर प्रदेश के मऊ से विधायक और बाहुबली नेता रहे मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यूपी के गिरोहबंद अधिनियम के तहत एक केस में विधायक अब्बास अंसारी को सशर्त अंतरिम जमानत दे दी है। पिछले साल सात मार्च को शीर्ष अदालत ने अंसारी को इस मामले में छह सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जे. बागची एवं न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने मंगलवार को अंसारी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अधिवक्ता निजाम पाशा की दलीलों पर गौर किया तथा मामले में पहले दी गई अंतरिम जमानत को नियमित कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि अब्बास अंसारी को उत्तर प्रदेश छोड़ने से पहले ट्रायल कोर्ट और पुलिस को सूचित करना होगा। साथ ही अपना कॉन्टेक्ट नंबर और यात्रा की जगह की जानकारी देने के बाद ही प्रदेश से बाहर की यात्रा की अनुमति मिल सकेगी।

दरअसल मार्च 2025 में शीर्ष अदालत से मिली राहत ने अंसारी की कासगंज जेल से रिहाई का रास्ता साफ कर दिया है। उनके खिलाफ अन्य सभी आपराधिक मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी है। पीठ ने कुछ शर्तें लगाई थीं और बाद में उनमें से कुछ में ढील दी थी, जिनमें यह शर्त भी शामिल थी कि वह जांच अधिकारी की अनुमति के बिना लखनऊ नहीं छोड़ सकते।

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अब्बास को चार नवंबर, 2022 को अन्य आपराधिक मामलों में हिरासत में लिया गया था और छह सितंबर, 2024 को गिरोहबंद अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। पीठ ने पिछले साल मार्च में उन्हें राहत देते हुए कहा कि गिरोहबंद अधिनियम के मामले को छोड़कर अन्य सभी आपराधिक मामलों में उन्हें जमानत दी गई है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 18 दिसंबर 2024 को इस मामले में अंसारी की जमानत याचिका खारिज कर दी। इस मामले में नवनीत सचान, नियाज अंसारी, फराज खान और शाहबाज आलम खान अन्य आरोपित हैं।

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