आरयू वेब टीम। देश के पूर्व रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता मुकुल रॉय की कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई है। उन्होंने कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित अपोलो हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु रॉय ने उनके निधन की पुष्टि की है। निधन की खबर से टीएमसी में शोक की लहर दौड़ गई।
मिली जानकारी के मुताबिक मुकुल राॅय की देर रात अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद आनन-फानन में अस्पताल लाया गया। इलाज के दौरान रात करीब 1.30 पर मुकुल राॅय ने अंतिम सांस ली। मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु रॉय ने उनके निधन की पुष्टि की है। पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री 71 वर्ष के थे और पिछले कुछ वर्षों से मुकुल रॉय सक्रिय राजनीति से दूर थे क्योंकि उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही थी। 2023 की शुरुआत में डॉक्टरों ने बताया था कि वह डिमेंशिया और पार्किंसन जैसी बीमारियों से जूझ रहे थे, जिससे उनकी याददाश्त और शारीरिक क्षमता प्रभावित हुई।
मार्च 2023 में उन्हें हाइड्रोसेफेलस के इलाज के लिए ब्रेन सर्जरी करानी पड़ी। जुलाई 2024 में घर पर गिरने से उनके सिर में चोट लगी और खून का थक्का निकालने के लिए फिर सर्जरी करनी पड़ी। उन्हें डायबिटीज, सांस की तकलीफ और लगातार हाई ब्लड शुगर की भी समस्या थी, जिससे उनकी हालत काफी कमजोर हो गई थी। मुकुल रॉय को कभी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के बाद दूसरा सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता था। वह पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार थे और 2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की बड़ी जीत में उनकी अहम भूमिका रही, जिससे 34 साल पुरानी वाम मोर्चा सरकार का अंत हुआ।
2012 में वह यूपीए-2 सरकार में देश के 32वें रेल मंत्री बने। उन्होंने 20 मार्च से 21 सितंबर 2012 तक यह पद संभाला। उन्होंने दिनेश त्रिवेदी की जगह ली थी, जिनके रेल किराया बढ़ाने के प्रस्ताव पर विवाद हुआ था। हालांकि, नारदा स्टिंग ऑपरेशन विवाद के बाद पार्टी में उनकी स्थिति कमजोर हो गई और 2017 में उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया।
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गौरतलब है कि नवंबर 2017 में मुकुल रॉय भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए और 2020 में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने। उन्होंने पश्चिम बंगाल में भाजपा की चुनावी रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई और 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। चुनाव परिणाम के बाद अगस्त 2021 में वह ममता बनर्जी और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में फिर से तृणमूल कांग्रेस में लौट आए, लेकिन खराब स्वास्थ्य के कारण वह सक्रिय राजनीति में ज्यादा भाग नहीं ले सके।




















