शंकराचार्य अविमुक्तेश्‍वरानंद की गिरफ्तारी पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक, फैसला रखा सुरक्षित

इलाहाबाद उच्च न्यायालय

आरयू ब्यूरो, लखनऊ/प्रयागराज। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने शंकराचार्य के खिलाफ दर्ज पॉक्सो  मामले में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। जैसे ही न्यायमूर्ति ने यह आदेश सुनाया, अदालत कक्ष में मौजूद वकीलों और समर्थकों ने तालियां बजाकर खुशी का इजहार किया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

सुनवाई के दौरान शंकराचार्य के अधिवक्ताओं ने पुलिस की विवेचना और मुकदमे की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। बचाव पक्ष ने दलील दी कि यह पूरा मामला माघ मेले के दौरान हुए विवाद का परिणाम है। अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि मौनी अमावस्या के दिन जब शंकराचार्य पालकी पर स्नान के लिए जा रहे थे, तब प्रशासन के साथ उनका विवाद हुआ था। आरोप है कि पुलिस ने बटुकों और शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार किया, जिसके विरोध में शंकराचार्य 11 दिनों तक धरने पर बैठे रहे।

कराया गया प्रयोजित मुकदमा

साथ ही वकील ने आरोप लगाया कि जब धरना समाप्त कर वह काशी चले गए, तब दबाव में ये ‘प्रायोजित’ मुकदमा दर्ज कराया गया। बचाव पक्ष ने ये भी खुलासा किया कि शिकायतकर्ता खुद एक हिस्ट्रीशीटर है, जिस पर हत्या, दुष्कर्म और गो-हत्या जैसे संगीन मामले दर्ज हैं और वह 25 हजार रुपये का इनामी भी है।

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शंकराचार्य के वकील ने तर्क दिया कि जिन बच्चों को पीड़ित बताया गया है, वे हरदोई के एक स्कूल में पढ़ रहे हैं और उनका मेडिकल परीक्षण भी घटना के करीब एक महीने बाद कराया गया, जो पूरी कहानी को संदिग्ध बनाता है।

योगी सरकार के अपर महाधिवक्‍ता ने जताई आपत्ति

सुनवाई के दौरान योगी सरकार की ओर से पेश हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति जताई। उन्होंने तर्क दिया कि अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट आना उचित नहीं है और यह केवल असाधारण परिस्थितियों में ही संभव है। हालांकि कोर्ट ने इस तर्क को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह कोई अनिवार्य बाधा नहीं है। जब कोर्ट ने सरकार से बच्चों की स्थिति के बारे में पूछा, तो बताया गया कि उन्हें बाल कल्याण समिति के माध्यम से माता-पिता को सौंप दिया गया है। फिलहाल, हाईकोर्ट के इस आदेश ने शंकराचार्य के अनुयायियों के बीच भारी राहत की लहर पैदा कर दी है।

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